नई दिल्ली, जून 8। वर्ल्ड बैंक ने भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) सेक्टर की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया है। वर्ल्ड बैंक के कार्यकारी निदेशक मंडल ने एमएसएमई सेक्टर को फिर से पटरी पर लाने के लिए 50 करोड़ डॉलर यानी करीब 3641 करोड़ रु के प्रोग्राम को मंजूरी दी है। एमएसएमई सेक्टर कोविड-19 संकट से बहुत अधिक प्रभावित हुआ है, जिसके चलते एमएसएमई सेक्टर ने यह ऐलान किया है। इस प्रोग्राम का टार्गेट 555,000 एमएसएमई के प्रदर्शन में सुधार करना है।

पहले भी की है मदद
विश्व बैंक ने एमएसएमई की मदद के लिए दूसरी बार हाथ आगे बढ़ाया है। इस बार उसने 50 करोड़ डॉलर की मदद का ऐलान किया है। जबकि पहले 75 करोड़ डॉलर एमएसएमई इमरजेंसी रेस्पोंस प्रोग्राम की शुरुआत जुलाई 2020 में की गयी थी। चल रही कोविड-19 महामारी से गंभीर रूप से प्रभावित लाखों एमएसएमई की तत्काल लिक्विडिटी और लोन आवश्यकताएं पूरी की गयीं।
क्या है एमएसएमई का योगदान
वर्ल्ड बैंक की तरफ से जारी की गयी रिलीज में कहा गया है कि एमएसएमई क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 30 प्रतिशत और निर्यात में 40 प्रतिशत का योगदान देता है। भारत में लगभग 5.8 करोड़ एमएसएमई में से 40 प्रतिशत से अधिक के पास फाइनेंस के औपचारिक स्रोतों तक पहुंच नहीं है। वर्ल्ड बैंक के इस प्रोग्राम को आरएएमपी (रेजिंग एंड एक्सेलेरेटिंग माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइज परफॉर्मेंस प्रोग्राम) नाम दिया गया है।
आराम से मिलेगी फाइनेंसिंग
आरएएमपी प्रोग्राम एमएसएमई के लिए फाइनेंस और वर्किंग कैपिटल तक बेहतर एक्सेस प्रदान करेगा। इंटरनेशनल बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट के 50 करोड़ डॉलर के लोन की मैच्योरिटी अवधि 18.5 वर्ष है, जिसमें 5.5 वर्ष की ग्रेस अवधि भी शामिल है। वर्ल्ड बैंक के अधिकारी के अनुसार भारत में एमएसएमई क्षेत्र कई चुनौतियों का सामना करता है। भारत में एमएसएमई सेक्टर कई चुनौतियों का सामना करता है। फाइनेंशियल और नॉन-फाइनेंशियल सेवाओं के औपचारिक स्रोतों तक एक्सेस को मजबूत करने की आवश्यकता है।


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