नई दिल्ली, 3 मार्च। सफलता की हर कहानी हमें एक बात बताती है कि सफलता के चुटकियों में मिलने जैसी कोई घटना नहीं होती। आप अपने उद्देश्य को केवल कठिन प्रयास, दृढ़ता और लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत से प्राप्त कर सकते हैं। इसीलिए आज हम आपके लिए उन चार भाइयों की सफलता की कहानी लेकर आए हैं, जिन्होंने अपनी पान की दुकान को 300 करोड़ रुपये के डेयरी बिजनेस में बदल दिया। आगे जानिए इन भाइयों की कहानी।
कैसे शुरू किया सफर
1987 में चावंड गांव के चार भुवा भाई अच्छे जीवन की तलाश में गुजरात के अमरेली पहुंचे। इन चार भाइयों के नाम हैं दिनेश, जगदीश, भूपत और संजीव। उन्होंने घर छोड़ने से पहले अपने पिता द्वारा दिए गए पैसे का उपयोग करके नए शहर में पान की दुकान शुरू की। गांव में उनके पिता बतौर किसान काम करते थे। अधिक ग्राहकों तक पहुंचने के उद्देश्य से बड़े भाई दिनेश की सलाह पर सिटी बस स्टॉप के पास इन भाइयों ने पान की दुकान खोली।
300 करोड़ रु की कंपनी
छोटे सी दुकान पर वे कोल्ड ड्रिंक भी बेचते थे। समय के साथ उन्होंने अपने छोटी से पान की दुकान को 300 करोड़ रुपये के बिजनेस में डेवलप किया। उनकी कंपनी तीन दशक बाद सैकड़ों प्रकार के डेयरी और रसोई उत्पादों की पेशकश करती है। पान की दुकान से उन्हें अच्छा जीवन जीने लायक कमाई हो रही थी। वे आराम से जीवन चला पा रहे थे। मगर शुरुआत में उन्हें कुछ झटकों का सामना करना पड़ा।
खरीदनी पड़ी दुकान
शहर में 1989 में निर्माण और सौंदर्यीकरण का काम हुआ। इसके परिणामस्वरूप उनका खोका खत्म हो गया। बाद में इन भाइयों ने बस अड्डे के पास एक छोटी सी दुकान खरीद ली। उन्होंने एक काम बहुत बढ़िया किया और वो है बिजनेस के साथ प्रयोग। उन्होंने 1993 में जन्माष्टमी पर आइसक्रीम परोसना भी शुरू किया। उन्होंने एक स्थानीय निर्माता से आइसक्रीम खरीदी और उसे अच्छे प्रोफिट पर बेचा।
आइसक्रीम से मिली कामयाबी
उनका यही आइसक्रीम बिजनेस सफल रहा और इसने उनके लिए अपना आइसक्रीम पार्लर खोलने का रास्ता साफ कर दिया। 1996 के बाद से, उन्होंने हाथ से बनी आइसक्रीम बनाना और बेचना शुरू कर दिया। फिर उनके ग्राहकों की संख्या में वृद्धि होती गयी। 1998 में उन्होंने कंपनी का नाम बदलकर श्री शीतल इंडस्ट्रीज कर लिया। कंपनी ने तब लोकल रिटेल एस्टेब्लिशमेंट में आइसक्रीम बेचकर अपनी मार्केट का विस्तार करना शुरू किया।
बिजली की दिक्कत
हालांकि बिजली की कटौती उनके लिए एक बड़ी बाधा थी। लेकिन फिर भाग्य ने साथ दिया और गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्राम ज्योति योजना की शुरुआत की। 2012 में शीतल कूल प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का नाम बदलकर शीतल कूल प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड कर दिया गया। तब फर्म ने नए दूध उत्पाद पेश किए थे। 2016 तक फर्म ने नमकीन के कारोबार में भी विस्तार किया। अगले वर्ष इसे एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी शीतल कूल प्रोडक्ट्स लिमिटेड के रूप में लिस्ट किया गया। इस कंपनी की मार्केट वैल्यू बीएसई के अनुसार करीब 296 करोड़ रु है। कंपनी का शेयर इस समय करीब 282 रु पर है। 800 महिलाओं सहित 1,500 कर्मचारी कंपनी के साथ काम कर रहे हैं। कंपनी डेली 2 लाख गैलन दूध प्रोसेस करती है। इसने आठ बाजार कैटेगरियों में एंट्री की और अब यह 500 से अधिक वस्तुओं की बिक्री करती है।
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