नई दिल्ली। परिभाषा के अनुसार, एमएसएमई का मतलब 'सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम' है। हालाँकि, जब भारतीय अर्थव्यवस्था में उनकी भूमिका की बात आती है, तो ये शब्द 'ताकतवर, महत्वपूर्ण और सार्थक उद्यम' भी पढ़े जा सकते हैं। ऐसा क्यों है आइए जानते हैं। दरअसल भारत में लगभग 6.3 करोड़ एमएसएमई हैं। कुल मिला कर यह सेक्टर लगभग 11.10 करोड़ लोगों को रोजगार देता है, और सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इसका लगभग 30 फीसदी योगदान है। हैरानी की बात नहीं है कि एमएसएमई सेक्टर ने भारतीय अर्थव्यवस्था की 'रीढ़' होने का दर्जा हासिल किया है।
हालाँकि यही रीढ़ पिछले दो वर्षों से गंभीर तनाव से जूझ रही है। मांग में अचानक गिरावट, वर्कफोर्स की अनुपलब्धता और मजदूरी का भुगतान करने में असमर्थ होने से लेकर लिक्विडिटी की कमी तक, एमएसएमई को कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन का सबसे कठोर खामियाजा भुगतना पड़ा है। इस सेक्टर को सपोर्ट करने के लिए, सरकार ने कई योजनाएं शुरू कीं। जैसे कि आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस)। हालांकि इसने दर्द को कुछ हद तक कम कर दिया है, मगर कुछ समस्याएं क्रेडिट गैप को पैदा करना जारी रखे हुए हैं। इस समय बचे रहने और फलने-फूलने के लिए, एमएसएमई के पास पर्याप्त पूंजी तक एक्सेस होना चाहिए। समस्या यह है कि यह उतना आसान नहीं है जितना लगता है।

एमएसएम के लिए कैपिटल हासिल करने में निम्नलिखित दिक्कतें हैं
- औपचारिक लोन से जुड़ी जानकारी की कमी
- क्रेडिट और लेन-देन इतिहास का खराब रिकॉर्ड रखना, जिससे एमएसएमई के लिए आवश्यक दस्तावेज हासिल करना मुश्किल हो जाता है
- अपर्याप्त कागजी कार्रवाई के कारण विलंबित कर्ज की मंजूरी
सीधे शब्दों में कहें तो उधारदाताओं के लिए एमएसएमई के उधार लेने की क्षमता का आकलन करना मुश्किल हो जाता है यह लोन के लिए जरूरी समय को बहुत लंबा बना देता है। मंजूर होने वाले लोन पर उच्च ब्याज दर होती है।
इस अड़चन को दूर करने के लिए, एमएसएमई को अपने वित्तीय स्वास्थ्य का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा। और यह जीएसटी रिपोर्ट के साथ सिबिल रैंक और कंपनी क्रेडिट रिपोर्ट के माध्यम से संभव हुआ है। आइए इनमें से प्रत्येक को अलग से समझें।
सिबिल रैंक और कंपनी क्रेडिट रिपोर्ट को समझें
कंपनी क्रेडिट रिपोर्ट (सीसीआर) : कंपनी के क्रेडिट इतिहास का एक रिकॉर्ड है, और इसके वित्तीय स्वास्थ्य का एक संकेतक होता है। ऋणदाता सीसीआर के आधार पर लोन देते हैं।
सिबिल रैंक : यह एक नंबर में सीसीआर का सारांश होता है। आम तौर पर अगर किसी कंपनी की सिबिल रैंक 1 और 4 के बीच है, तो लोन मिलने की संभावना बहुत अधिक होती है।
जीएसटी रिपोर्ट : बिजनेस के जीएसटी रिटर्न पर आधारित है और इसमें जीएसटी फाइलिंग सारांश, भुगतान किए गए जीएसटी की महीने-वार ट्रेंड रिकॉर्ड, मासिक बिक्री और खरीद डेटा का रिकॉर्ड (विस्तार से टुकड़ों सहित) और पिछले 24 महीनों में बिक्री और खरीद के ट्रेंड की तुलना जैसी डिटेल शामिल हैं। जीएसटी रिपोर्ट जीएसटी पोर्टल से लिए गए आंकड़ों पर आधारित है, इसलिए यह बैंकों के लिए जानकारी का एक विश्वसनीय स्रोत है और कर्ज लेने की योग्यता के आकलन की प्रक्रिया में तेजी ला सकता है|
जीएसटी रिपोर्ट के साथ सिबिल रैंक और सीसीआर का उपयोग करने के फायदे
जैसा कि स्पष्ट है, जीएसटी रिपोर्ट के साथ सिबिल रैंक और सीसीआर कारोबार का एक 360 डिग्री दृश्य सामने रखता है, जिसमें क्रेडिट हिस्ट्री और ओवरऑल फाइनेंशियल जानकारी होती है। यह उधारकर्ताओं के साथ-साथ उधारदाताओं के लिए उधार देने की प्रक्रिया को आसान बनाता है। इसके कई लाभ हैं, यहाँ कुछ सबसे महत्वपूर्ण बताए जा रहे हैं
यह रिपोर्ट एमएसएमई मालिकों को अपने वित्तीय स्वास्थ्य की पूरी समझ रखने में मदद करती है।
एमएसएमई को प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों के साथ-साथ औपचारिक ईकोसिस्टम से लोन के अधिक अवसर मिलते हैं। कुछ ऋणदाता एमएसएमई को 1 और 4 के बीच सिबिल रैंक वाली अच्छी ब्याज दरों की पेशकश करते हैं।
इन रिपोर्टों के माध्यम से बैंकों को कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य की कुल जानकारी मिल जाती है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि एमएसएमई को समय पर पूंजी मिल सके।
यह कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य का प्रमाण होता है, इसलिए सरकारी निविदाओं के लिए परियोजना प्रस्ताव पेश करना आसान हो जाता है।
जीएसटी रिपोर्ट जीएसटी आधारित लोन रूट के माध्यम से लोन के लिए आवेदन करने का अवसर देती है।
इन लाभों को देखते हुए, एमएसएमई को सलाह दी जाती है कि वे जीएसटी रिपोर्ट के साथ समय-समय पर अपनी सिबिल रैंक और सीसीआर की समीक्षा करें। यह सुनिश्चित करने के लिए कि अधिक से अधिक एमएसएमई इस रिपोर्ट तक एक्सेस ले सकें, ट्रांसयूनियन सिबिल ने सुनिश्चित किया है कि इन्हें प्राप्त करने की प्रक्रिया तेज, बाधारहित और कागज रहित हो।
जीएसटीएन-आधारित वेरिफिकेशन के साथ और बिना सिबिल रैंक और सीसीआर प्राप्त करें
जीएसटीएन आधारित वेरिफिकेशन के साथ रिपोर्ट प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया कागज रहित और आसान है।
ए. ग्राहक https://cibilrank.cibil.com/ पर जा सकते हैं और एक सब्सक्रिप्शन पैकेज का चयन कर सकते हैं, जो उनकी क्रेडिट आवश्यकताओं को पूरा करता है।

बी. उन्हें अपना जीएसटीएन दर्ज करना होगा और ग्रीन वेरिफिकेशन टिक की प्रतीक्षा करनी होगी। फिर आगे बढ़ें।


सी. उन्हें पहले से भरे हुए एनरोलमेंट फॉर्म पर भेजा जाएगा। उन्हें पृष्ठ पर दी गई जानकारी को वेरिफाई करना होगा। ध्यान रहे कि कॉन्टैक्ट इंफॉर्मेशन की जरूरी चीजें याद रखें।

डी. उन्हें आगे बढ़ने के लिए अपनी सहमति देनी होगी।

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एफ. फिर उन्हें ओटीपी दर्ज और वेरिफाई करना होगा।

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जीएसटीएन-आधारित सत्यापन के बिना प्रक्रिया को पूरा करने का भी एक तरीका है। इसके लिए ग्राहक से अतिरिक्त जानकारी की आवश्यकता होगी। ये है उसकी प्रोसेस -
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सी. इस स्तर पर, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी भेजा जाएगा। जारी रखने के लिए इसे दर्ज करें।

डी. फिर, भुगतान पेमेंट गेटवे पर करें, जिसके बाद पेज धन्यवाद मैसेज पर ले जाएगा।
इ. थैंक यू पेज पर केवाईसी दस्तावेज अपलोड करने का विकल्प होगा। एक बार ये अपलोड हो जाने के बाद, रिपोर्ट देखने के लिए उपलब्ध हो जाएगी।
आज की जटिल और अनिश्चित दुनिया में औपचारिक लोन प्राप्त करने के विकल्पों के तरीकों के साथ बिजनेस के वित्तीय स्वास्थ्य के बारे में स्पष्टता होना एमएसएमई के लिए गेम-चेंजर हो सकता है। सीसीआर, सिबिल रैंक और जीएसटी रिपोर्ट, जो कारोबार का 360-डिग्री दृश्य पेश करती है, वह एमएसएमई मालिकों के लिए कंपनी के फाइनेंस के बारे में अपनी समझ में सुधार करने और तुरंत, सरल और पेपरलेस तरीके से बेहतर नियंत्रण हासिल करने का एक शानदार तरीका है।
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