नई दिल्ली। मोदी सरकार ने लघु, कुटीर एवं मध्यम उपक्रम यानी एमएसएमई के 1 जून से बिना गारंटी वाली कर्ज देने वाली स्कीम की शुरुआत की है। अभी यह योजना शुरू हुए केवल 5 दिन ही हुए हैं। लेकिन इस दौरान करीब 8 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के कर्ज बंट चुके हैं। वित्त मंत्रालय ने रविवार को बताया है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने आपातकालीन ऋण सुविधा गारंटी योजना के तहत 5 जून तक एमएसएमई को 8,320 करोड़ रुपये के कर्ज बांट दिए हैं। वहीं 1 जून से शुरू बिना गारंटर वाली इस योजना के तहत सरकारी बैंकों ने 17,705.64 करोड़ रुपये के कर्ज को मंजूरी भी दी है। इस योजना के तहत सबसे ज्यादा कर्ज एसबीआई ने जारी किए हैं।

आत्मनिर्भर भारत पैकेज का हिस्सा है यह योजना
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कोरोना वायरस महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के आत्मनिर्भर भारत पैकेज की घोषणा की थी। इस पैकेज का सबसे बड़ा हिस्सा लघु, कुटीर एवं मध्यम उपक्रम (एमएसएमई) के लिए दिया गया था। कुल मिलाकर इस योजना क तहत एमएसएमई के 3 लाख करोड़ रुपये की आपातकालीन ऋण सुविधा देने की घोषणा की गई थी।
वित्त मंत्री ने खुद ही दी जानकारी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक ट्वीट में कहा है कि 5 जून 2020 तक सरकारी बैंकों ने 100 प्रतिशत आपातकालीन ऋण सुविधा गारंटी योजना के तहत 17,705.64 करोड़ रुपये के कर्ज को मंजूरी दी है। इनमें से 8,320.24 करोड़ रुपये के कर्ज का वितरण कर दिया गया है।
सबसे ज्यादा कर्ज एसबीआई ने किया मंजूर
इस योजना के तहत भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने करीब 11,701 करोड़ रुपये के कर्ज मंजूर किये हैं। वहीं इस मंजूर कर्ज में से लगभग 6,084.71 करोड़ रुपये के कर्ज बांट भी दिए हैं। इसके बाद पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) ने 1,295.59 रुपये के कर्ज को मंजूरी दी है, और 242.92 करोड़ रुपये के कर्ज का वितरण किया है। मंत्रिमंडल ने एमएसएमई के लिये आपातकालीन ऋण सुविधा गारंटी योजना के माध्यम से 9.25 प्रतिशत की रियायती दर पर 3 लाख करोड़ रुपये तक के अतिरिक्त कर्ज को 21 मई 2020 को मंजूरी दी थी।
लोन के लिए गारंटी कवरेज
इस योजना के तहत पात्र एमएसएमई और इच्छुक कर्ज लेने वालों को 3 लाख करोड़ रुपये तक के अतिरिक्त वित्त पोषण के लिये नैशनल ऋण गारंटी न्यासी कंपनी (एनसीजीटीसी) की तरफ से पूर्ण गारंटी प्रदान की जाएगी। इसके लिये सरकार की तरफ से चालू वित्त वर्ष और अगले 3 वित्त वर्ष के दौरान 41,600 करोड़ रुपये मुहैया कराये जाएंगे।


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