नयी दिल्ली। मंगलवार को पीएम मोदी ने कोरोना संकट से निपटने के लिए आत्मनिर्भर भारत प्लान के तहत 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज का ऐलान किया था। इसी पर आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अधिक जानकारी दी। राहत पैकेज में कई सेक्टरों का ध्यान रखा गया है, जिनके बारे में आने वाले दिनों में और भी जानकारी दी जाएगी। आज वित्त मंत्री ने कुछ सेक्टरों के लिए बड़ी घोषणाएं कीं, जिनमें एमएसएमई (सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्योग) शामिल हैं। आइए जानते हैं 10 प्वाइंट में सरकार के एमएसएमई को दिए गए गिफ्ट के बारे में।

3 लाख करोड़ रुपये का ऐलान
एमएसएमई को कई सहूलियतों के साथ 3 लाख करोड़ की ऋण सुविधा का ऐलान किया गया है। खास बात यह है कि ये लोन बिना गारंटी वाला होगा। इससे 45 लाख एमएसएमई कंपनियों को फायदा मिलेगा। ये लोन अक्टूबर में दिया जाना शुरू किया जाएगा।
संकट में चल रही कंपनियों को अतिरिक्त लोन
बता दें कि संकट में चल रहे एमएसएमई को 20 हजार करोड़ के अतिरिक्त लोन का भी ऐलान किया गया है। लॉकडाउन के कारण एमएसएमई सेक्टर काफी दबाव में ऐसे में सरकार इस कदम से सेक्टर को काफी राहत मिलेगी।
एमएसएमई परिभाषा बदली
एमएसएमई की परिभाषा बदली गई है। कारोबार बढ़ने पर बड़ी कंपनियां भी एमएसएमई बनी रहेंगी और उन्हें एमएसएमई के फायदे मिलते रहेंगे। यानी टर्नओवर बढ़ने पर भी किसी कंपनी को एमएसएमई कैटेगरी में रखा जाएगा।
सूक्ष्य एमएसएमई
1 करोड़ रुपये का निवेश और 5 करोड़ रुपये के कारोबार वाली एमएसएमई को सूक्ष्य कैटेगरी में रखा जाएगा।
स्मॉल एमएसएमई
10 करोड़ रुपये का निवेश और 50 करोड़ रुपये के कारोबार वाली एमएसएमई को स्माल कैटेगरी में रखा जाएगा।
मीडियम एमएसएमई
20 करोड़ रुपये का निवेश और 100 करोड़ रुपये के कारोबार वाली एमएसएमई को सूक्ष्य कैटेगरी में रखा जाएगा।
200 करोड़ तक के टेंडर में बदलाव
सरकार की तरफ से एक बड़ा ऐलान सरकारी टेंडर को लेकर किया गया है। अब 200 करोड़ रुपये तक के सरकारी टेंडर ग्लोबल नहीं होंगे। यह एमएसएमई को इन बड़ी परियोजनाओं के लिए आपूर्ति करने का मौका देगा।
सरकारी भुगतान 45 दिनों में
45 दिनों में एमएसएमई के बकाया बिल का भुगतान सरकार कर देगी। ये एमएसएमई के लिए बड़ी राहत है।
ई-मार्केट से जोड़ा जाएगा
सरकार ने अपनी तरफ से एमएसएमई को ई-मार्केट से जोड़ने का ऐलान किया है। बता दें कि कल पीएम मोदी ने स्थानीय चीजों को बढ़ावा देने को कहा था। एमएसएमई को ई-मार्केट से जोड़ना इस दिशा में बड़ा कदम हो सकता है।
50000 करोड़ रुपये का इक्विटी निवेश
फंड्स ऑफ फंड के जरिए उन MSMEs में 50,000 करोड़ रुपये का इक्विटी निवेश किया जाएगा जिनकी क्षमता बेहतर और व्यवहार्य हैं।
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