नई दिल्ली, मई 12। साबुन एफएमसीजी प्रोडक्ट है और करोड़ों लोगों द्वारा प्रतिदिन उपयोग किया जाने वाला एक जरूरी प्रोडक्ट है। साबुन इंडस्ट्री में कई तरह के प्रोडक्ट होते हैं। जैसे कि पर्सनल सोप, पशु चिकित्सा सोप (वेटनरी) और कपड़े धोने का सोप। पर्सनल केयर सोप सेगमेंट में बड़ी कंज्यूमर गुड्स कंपनियों का दबदबा है, जबकि वेटनरी यूज और लॉन्ड्री यूज सेगमेंट में बड़ी कंपनियों का दबदबा कम है। इस लेख में हम भारत में साबुन मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस शुरू करने की प्रोसेस की जानकारी देंगे।
सोप मेकिंग बिजनेस
साबुन बनाना आसान प्रोसेस है और इसे प्लांट और इक्विपेंट में न्यूनतम निवेश के साथ आसानी से किया जा सकता है। सौंदर्य साबुन या पर्सनल उपयोग साबुन 3 फेज में बनाया जा सकता है। साबुन का आधार तैयार करना, अंतिम आधार तैयार करना और स्टांपिंग। साबुन बनाने के लिए प्राथमिक कच्चा माल तेल और फैट है। टॉयलेट साबुन लिक्विड फैट को सोडियम हाइड्रॉक्साइड (जिसे लाइ भी कहा जाता है) जैसे क्षार के साथ मिलाकर बनाया जाता है। क्लियर साबुन में आमतौर पर ग्लिसरीन और सोर्बिटोल होते हैं और एंटी-बैक्टीरियल साबुन ट्राइक्लोसन पर निर्भर होते हैं।
कितना होगा निवेश
एक छोटा साबुन मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस शुरू करने के लिए आवश्यक न्यूनतम निवेश करीब 4-5 लाख रु है। इस निवेश के साथ आप एक साबुन निर्माण इकाई तैयार कर सकते हैं। बिजनेस बढ़ने पर 50 लाख रुपये तक की इनकम और 8 लाख रुपये का प्रोफिट हो सकता है। साबुन एक ऐसा प्रोडक्ट है जिसकी जरूरत हर किसी को है। इसलिए इस प्रोफिट में बिजनेस की उम्मीद काफी अधिक है।
कितनी जगह चाहिए होगी
एक छोटी साबुन मैन्युफैक्चरिंग इकाई के लिए लगभग 750 वर्ग फुट की जगह की आवश्यकता होती है, जिसमें से लगभग 500 वर्ग फुट को मैन्युफैक्चरिंग के लिए किया जाना चाहिए। आपको बिजली और पानी की आपूर्ति भी चाहिए।
मशीनरी चाहिए
एक छोटा साबुन बनाने का बिजनेस भी बिना मशीनरी के शुरू नहीं हो सकता। मशीनरी की लिस्ट में प्लोडर मशीन, मिलर मशीन, सैप स्टैम्पिंग मशीन और साबुन काटने की मशीन शामिल हैं। निर्मित किए जाने वाले उत्पाद के प्रकार और पैमाने के आधार पर, मशीनरी में आवश्यक प्रकार और निवेश अलग-अलग होंगे। यानी एक छोटी साबुन मैन्युफैक्चरिंग इकाई में निवेश अलग-अलग हो सकता है। आपको आवश्यक लाइसेंस, सहायक इक्विपमेंट, कच्चा माल आदि सब सेट करने के लिए लगभग 3 से 6 महीने का समय लग सकता है।
बिजनेस का रजिस्ट्रेशन
साबुन निर्माण बिजनेस को लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी) या प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में शुरू करने की सलाह दी जाती है। एलएलपी या प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बिजनेस होने से यह सुनिश्चित होगा कि यूनिट के पास बैंक लोन तक आसान एक्सेस है। भारत में विभिन्न बैंकों से साबुन निर्माण के लिए बैंक लोन प्राप्त किया जा सकता है। आवश्यक निवेश की राशि 1 करोड़ रुपये से कम होगी, इसलिए बिना किसी कोलेट्रोल के लोन प्राप्त किया जा सकता है। ध्यान रहे कि एक साबुन निर्माण इकाई के लिए मैन वर्किंग कैपिटल एक्सपेंडिचर कच्चा माल, वेतन और मजदूरी, बिजली की लागत आदि हैं। फ्चूयर में आप अपना बिजनेस और बढ़ा सकते हैं। अपने प्रोडक्ट की संख्या बढ़ा सकते हैं।
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