वर्ल्ड बैंक भारत की छोटी-मझौली कंपनियों की मदद के लिए आगे आया है।
नई दिल्ली: वर्ल्ड बैंक भारत की छोटी-मझौली कंपनियों की मदद के लिए आगे आया है। वर्ल्ड बैंक ने एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) की मदद के लिए 75 करोड़ अमेरिकी डॉलर यानी 5625 करोड़ रुपये का लोन देने का ऐलान किया है। यह रकम, सरकार द्वारा घोषित पैकेज (आत्मनिर्भर भारत कार्यक्रम) के तहत एमएसएमई की मदद करेगी। MSME : आज से नहीं मांगा जाएगा कोई डाक्यूमेंट, ऑनलाइन होगा रजिस्ट्रेशन ये भी पढ़ें

वर्ल्ड बैंक की वजह से 15 करोड़ एमएसएमई को मिलेगी मदद
वर्ल्ड बैंक की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि 75 करोड़ डॉलर की रकम छोटी और मझौली कंपनियों की नकदी की समस्या का समधान करेंगी। क्योंकि, इन कंपनियों में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों की नौकरियां जाने का खतरा बना हुआ है। वर्ल्ड बैंक के इस कर्ज से 15 करोड़ एमएसएमई को मदद मिलेगी। भारत का एमएसएमई सेक्टर, देश की जीडीपी में 30 फीसदी योगदान देता है। वहीं, मौजूदा समय में इसके एक्सपोर्ट पर भारी दबाव है। ऐसे में इन कंपनियों में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों की नौकरी पर तलवार लटकी हुई है। अमेरिकी दिग्गज कंपनी डेल टेक्नोलॉजीज ने छोटे और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) और स्टार्ट-अप्स की मदद करने के लिए नैसकॉम (राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर व सेवा कंपनी संघ) के साथ हाथ मिलाया है। ये मदद प्रतियोगी कीमतों प्रोडक्ट और सर्विसेज देकर की जाएगी।
वर्ल्ड बैंक ने भारत को दिया 5.13 अरब डॉलर का कर्ज
जानकारी दें कि 2020 के वित्तीय वर्ष (जुलाई 2019-जून 2020) के दौरान, वर्ल्ड बैंक ने भारत को 5.13 अरब अमेरिकी डॉलर कर्ज दिया है, जो एक दशक में सबसे ज्यादा है। इसमें कोविड-19 महामारी के लिए तीन महीनों में दिए गए 2.75 अरब डॉलर शामिल हैं। वहीं नैसकॉम के साथ डेल की साझेदारी का प्रभाव 2400 से अधिक एमएसएमई और 9000 से अधिक स्टार्टअप्स पर पड़ेगा, जो नैसकॉम के 10,000 स्टार्ट-अप नेटवर्क का हिस्सा हैं। डेल की तरफ से दी जानकारी के मुताबिक उन्हें डेल के क्लाइंट और इन्फ्रास्ट्रक्चर समाधान पर विशेष ऑफ़र और रेट ऑफर किए जाएंगे। कंसोर्टियम ऑफ इंडियन असोसिएशन (सीआईए), देश भर में 30 से अधिक एसोसिएशंस का एक प्लेटफॉर्म, ने 'सेव एमएसएमई' अभियान शुरू किया है। बता दें कि केंद्र सरकार ने एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) के लिए 'डिस्ट्रेस्ड एसेट्स फंड्स-सबोर्डिनेट डेब्ट' स्कीम लॉन्च की थी। यह सबोर्डिनेट लोन के लिए क्रेडिट गारंटी योजना है, जिससे 2 लाख एमएसएमई को राहत मिलेगी।
छोटे उद्योगों को सरकार ने भी दी राहत
केंद्र सरकार ने देश में छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत एमएसएमई मंत्रालय ने एमएसएमई के क्लासिफिकेशन और रजिस्ट्रेशन के लिए गाइडलाइंस जारी की है। इसके अनुसार अब देशभर के एमएसएमई उद्यम कहलाएंगे। यही नहीं, अब एमएसएमई के रजिस्ट्रेशन के लिए किसी भी कागजात की जरूरत नहीं होगी। केवल स्वघोषणा के आधार पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन हो जाएगा। रजिस्ट्रेशन के वक्त कोई भी कागज अपलोड करने की जरूरत नहीं होगी। नए नियम 1 जुलाई से लागू हो गए हैं।
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