Success Story : महिला ने मराठी व्यंजनों से तैयार किया बिजनेस, करोड़ों रु में है कमाई

नई दिल्ली, जून 16। जब विनीत पाटिल स्कूल में थे, तो वह हमेशा अपनी माँ गीता पाटिल या पाटिल काकी के एक खास टैलेंट के कारण कक्षा में सबसे अधिक मशहूर थे। असल में वह अपने बेटे के लिए हर दिन एक स्वादिष्ट टिफिन पैक करती थीं। कक्षा के सभी बच्चों का ध्यान उनके टिफिन की तरफ रहता था। बाकी सभी बच्चे भोजन के लिए सामान्य रोटी और सब्जी लाते थे, लेकिन विनीत की आई (माँ) हमेशा उनके लिए कुछ नया पैक करती थीं। उनकी आई के पास एक अनूठा तरीका था। वे चाहती थीं कि उनका बेटा पूरा टिफिन खाए। इसके लिए वह एक सब्जी का भरावन बनातीं और उसे रेगुलर पराठे के आटे में मिलाती। फर्क सिर्फ इतना था कि यह समोसे के आकार का होता। इससे विनीत सभी सब्जियों को खाते। मगर ऐसा भी होता कि इससे पहले विनीत खा पाते, उनके दोस्त उनका टिफिन खत्म कर देते।

खाने के बिजनेस ने बनाया कामयाब

खाने के बिजनेस ने बनाया कामयाब

गीता के लिए स्वादिष्ट भोजन पकाने और घर से बिजनेस चलाने का यह आइडिया उनकी अपनी माँ, कमलाबाई निवुगले से मिला, जो अपना खुद का बिजनेस चलाती थीं और हर दिन कम से कम 20 लोगों के लिए टिफ़िन पैक करती थीं। द बेटर इंडिया के अनुसार गीता कहती हैं कि वे अक्सर अपनी माता यानी विनीत की नानी की मदद करती थीं।

2016 में हुई सही शुरुआत

2016 में हुई सही शुरुआत

गीता के लिए ये तमाम सीखने वाली चीजें एक अच्छा बिजनेस शुरू करने के लिए एक मजबूत आधार साबित हुई। 2016 में, उन्होंने पारंपरिक महाराष्ट्रीयन स्नैक्स और मिठाइयाँ बेचने के लिए घर से एक छोटा बिजनेस शुरू किया। इनमें मोदक, पूरनपोली, चकली, पोहा और चिवड़ा शामिल रहे। कम निवेश और महीने-दर-महीने कुछ ग्राहकों को सेवाएं देने के साथ आज उनका बिजनेस 3,000 से अधिक ग्राहकों को खाना परोसता है।

कितना है बिजनेस

कितना है बिजनेस

उनका बिजनेस अब सालाना 1 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई करा रहा है। गीता मुंबई में पैदा हुई और पली-बढ़ी। उन्होंने यहीं रहने वाले एक परिवार में शादी की। यही शहर हमेशा उनका घर रहा। जीवन में उनका एकमात्र शिफ्ट विले पार्ले से सांताक्रूज़ का रहा। उनके पिता ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के साथ काम किया और उनकी माता हाउस वाइफ रहीं।

सभी धर्मों के लोगों से मिलते ऑर्डर

सभी धर्मों के लोगों से मिलते ऑर्डर

गीता के अनुसार वे विभिन्न धर्मों के लोगों वाले एक क्षेत्र में रहती हैं। अक्सर उनके मुस्लिम और कैथोलिक दोस्त चकली या पूरनपोली के लिए ऑर्डर देते। वे बिना कुछ चार्ज किए उनके लिए इसे बनातीं। 2016 तक, वे एक पसंद के तौर पर यह कर रही थीं। मगर उसी साल उनके पति की जॉब चली गयी। फिर उन्होंने इसे फुल टाइम बिजनेस बनाया। उनका पहला ऑर्डर खार के एक परिवार से आया था। सबसे अच्छी बात यह है कि आज भी उन्हें उनसे नियमित रूप से ऑर्डर मिलते हैं।

बेटे ने दिया साथ

बेटे ने दिया साथ

उनके बेटे विनीत ने सालाना कारोबार को 12,000 रुपये से बढ़ा कर 1.4 करोड़ रुपये करने पर काम किया। उन्होंने सांताक्रूज में 1,200 वर्ग फुट जगह ली, जहां से वे काम करते हैं। उनके पास 25 अन्य महिलाएं भी हैं जो उनके साथ काम करती हैं। उनके कारोबार का नाम पाटिल काकी है। अहम बात यह है कि उनके कर्मचारियों में लगभग 70 प्रतिशत ऐसी महिलाएं हैं जो पहली बार काम कर रही हैं।

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