अब्दुल अहद कश्मीर में रहते हैं. वे पहले खेती का काम करते थे. आज वे अपने केंचुआ खाद के बिजनेस से हर दिन 50 हजार रुपये कमा रहे हैं. अब्दुल अहद का यह बिजनेस आईडिया काफी यूनिक है. उतनी ही अनोखी अब्दुल अहद की कहानी भी है.

कोई भी बिजनेस आईडिया पर टिका होता है. अगर आपका आईडिया सबसे अलग है और वे बाकी लोगों की किसी तरह से मदद करता है, तो आपका बिजनेस लंबे समय तक टिक सकता है. अब्दुल कश्मीर के अनंतनाग में रहते हैं. वे ऑर्गेनिक खेती में विश्वास रखते आए है. अब्दुल की केंचुआ खाद यूनिट हर दिन 5 हजार किलोग्राम से ज्यादा खाद बनाती है.
इसके अलावा वे बाकी लोगों को भी केंचुआ खाद बनाने की मुफ्त ट्रेनिंग देते हैं.
कहां से मिला केंचुआ खाद बनाने का आईडिया
आप सोच रहें होंगे, की अब्दुल खेती करते है, तो वहीं से उन्हें यह आईडिया भी मिल गया होगा, लेकिन ऐसा नहीं है. जितना अनोखा यह आईडिया है, इसके पीछे की कहानी उतनी ही यूनिक है. अब्दुल एक दिन ट्रेन से ट्रेवल कर रहे थे. तभी उन्होंने दो महिलाओं को केंचुआ खाद के फायदे के बारे में बात करते सुना.
उन्हें महिलाओं की इस बात पर इतनी दिलचस्पी आई कि उन्होंने भी केंचुआ खाद बिजनेस शुरू करने के बारे में सोचा. लेकिन इससे पहले उन्होंने यह खाद अपने खेतो में इस्तेमाल किया था.
कैसे शुरू किया केंचुआ खाद का बिजनेस?
अब्दुल पहले से ही खेती करते थे. अब्दुल के पास अनंतनाग जिले के सेमथान गांव में 5 एकड़ जमीन है. उन्होंने यह कभी नहीं सोचा था कि केंचुओं का इस्तेमाल खाद बनाने के लिए भी किया जा सकता है.जब वह ट्रेन से सफर करके घर आए तो वे सबसे पहले जिला कृषि अधिकारी के पास गए. उन्होंने अधिकारी से केंचुआ खाद के बारे में बातचीत की.
अब्दुल ने कृषि अधिकारी की मदद से 30 गड्ढों वाली एक केंचुआ खाद यूनिट तैयार की थी. लेकिन बाकी किसानों ने इस पर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और उन्हें ये काम बंद करना पड़ा. इस केंचुआ खाद के कई फायदें है. इस खाद से पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और मिट्टी भी अच्छी हो जाती है. जिसकी वजह से उत्पाद में भी बढ़ोतरी होती है.फसल की पैदावार और अच्छी होती है।
फिर से जगी उम्मीद
अब्दुल ने फिर भी हार नहीं मानी और 2002 में केंचुआ खाद को एक बार फिर बनाने की कोशिश की. उन्होंने केंचुआ खाद बनाने के लिए 15 x 3 फुट के चार बेड तैयार किए थे. इस केंचुआ खाद को उन्होंने अपनी खेती में इस्तेमाल किया. इस केंचुआ खाद से उनकी फसल उत्पादन काफी अच्छी हुई. जिसके बाद बाकी किसानों ने भी उनसे अगले साल यानी 2003 में 50 किलो के चार बैग बैचे.
जिसके बाद अब्दुल ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. अब्दुल ने बाद में एग्रो फार्म्स नाम से कंपनी की शुरुआत की.
आज वे 15 कनाल (1000 क्यारियों) में वर्मी कम्पोस्ट बनाते हैं और रोजाना 50 किलोग्राम के 100 से 120 बैग तैयार करते हैं. अनंतनाग जिले में अब्दुल के केंचुआ खाद की दो यूनिट और जम्मू में भी उनकी एक यूनिट है. उनके बैग की कीमत 500 रुपये है. वह अपने इस बिजनेस से सलाना 2 करोड़ रुपये कमा लेते हैं.
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