नई दिल्ली, 16 जनवरी। राजकोट की रहने वाली निशा हुसैन के लिए सफलता का मंत्र काफी आसान है। उनका मानना है कि जिस काम को करने में आपको मजा आता हो उसे गर्व से करना चाहिए, शर्म से नहीं। आप छोटी-छोटी नौकरियों से भी अच्छा पैसा कमा सकते हैं। कोई भी काम छोटा नहीं होता। अपने परिवार के विरोध का सामना करने के बावजूद, निशा ने 2017 में एक कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी छोड़ दी और अगले साल एक ठेले से गुप्त रूप से चाय बेचना शुरू कर दिया। अब, उन्हें प्यार से 'राजकोट की चायवाली' के रूप में जाना जाता है और वे 'द चायलैंड' नामक अपने स्टाल पर चाय के 10 फ्लेवर बेचती हैं।
चाय बनाना था पसंद
निशा को बचपन से ही खास मौकों पर चाय बनाना पसंद था। जब उन्होंने अपना बिजनेस शुरू किया, तो उन्हें विश्वास था कि वे सफल हो जाएंगी। लेकिन शुरुआत में उन्हें कोई ग्राहक नहीं मिले। लोग एक महिला को अकेले चाय की दुकान चलाते हुए देखने के आदी नहीं थे, और उनके पास आने से कतराते थे। उन्होंने अपनी अधिकांश चाय लगातार कम से कम 15 दिनों तक फेंक दी। क्योंकि वो बिकी ही नहीं।
कितने रु की है चाय
उनका बिजनेस अभी शुरू ही हो रहा था कि एक दिन, एक ग्राहक ने उनके स्टॉल की एक इंस्टाग्राम स्टोरी डाली जो वायरल हो गई। इसके बाद से चायलैंड में लोगों का आना शुरू हो गया। वे कहती हैं कि जब लोग मुझे राजकोट की चायवाली कहते हैं तो मुझे बहुत खुशी होती है। निशा के स्टॉल पर एक कप रेगुलर चाय की कीमत 10 रुपये है, फ्लेवर वाली चाय की कीमत 30 रुपये है। मगर उनका सबसे ज्यादा बिकने वाला प्रोडक्ट तंदूरी चाय है, जिसकी कीमत 40 रुपये है।
कुल्हड़ वाली चाय
द बेटर इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक निशा के अनुसार उबली हुई चाय को कुल्हड़ में डाला जाता है, जिसे तंदूर में रखा जाता है। इस प्रोसेस में धुआँ उठता है और बर्तन से मिट्टी का स्वाद इसे एक खास टेस्ट देता है, जो कि गावों में बिकने वाली 'चुल्हे वाली चाय' के समान होता है। वे अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक ग्राहकों के लिए ब्लैक टी और ग्रीन टी में अलग-अलग फ्लेवर भी पेश करती हैं।
और कौन-कौन से है फ्लेवर
चायलैंड में उपलब्ध चाय के अन्य फ्लेवर में अदरक-पुदीना, दालचीनी, लेमनग्रास, इलायची और मसाला चाय शामिल हैं। 2015 में हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद, निशा ने राजकोट सब-रजिस्ट्रार के कार्यालय में एक कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में काम करना शुरू कर दिया। वह कहती हैं कि उन्हें अपने काम में मज़ा नहीं आया और वह कॉर्पोरेट जगत छोड़ना चाहती थी। लेकिन आगे की पढ़ाई की कमी ने उनके वैकल्पिक इनकम के ऑप्शनों को सीमित कर दिया।
कितनी है इनकम
निशा ने अपनी 25,000 रुपये की बचत का इस्तेमाल एक स्टाल लगाने के लिए किया, जिससे अंततः 3,000 रुपये प्रतिदिन की कमाई हुई। वे पिछले साल तक हर महीने कम से कम 50,000 रुपये आराम से कमा रही थीं, लेकिन लॉकडाउन के दौरान उनकी चाय की दुकान को बंद करना पड़ा तो उन्हें भारी नुकसान हुआ। फिर जून में उन्होंने एक कैफे खोला, लेकिन इस लगातार चलाने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं कमा सकीं। उन्होंने दिवाली तक खुद को समय दिया और जब कैफे ने बिजनेस नहीं किया, तो उन्होंने अपना स्टाल फिर से खोलने और इसी पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया। अब वे आऱाम से हर महीने 45-50 हजार रु तक कमा रही हैं।


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