नई दिल्ली, अक्टूबर 01। तन्वी और हिमांशु पटेल गुजरात के एक दंपति हैं। वे आज के उन लोगों में से हैं, जिन्होंने स्वेच्छा से अपना कॉर्पोरेट करियर छोड़ दिया और जैविक (ऑर्गेनिक) खेती शुरू कर दी। इन्होंने जैविक खेती की खातिर अपनी मर्जी से कॉर्पोरेट करियर को छोड़ने का बड़ा फैसला किया। असल में जब उन्हें पता चला कि जिस किसान ने उनकी कृषि भूमि किराए पर ली थी, उसने उस पर रसायनों का छिड़काव किया गया था, तो उन्होंने अपना व्यवसाय छोड़ दिया और जैविक खेती करने का फैसला किया। आज वे इससे कमाई भी अच्छी कर रहे हैं। आगे जानिए उनकी कहानी।
किस प्रोफेशन में करते थे काम
मैकेनिकल इंजीनियर हिमांशु ने जब अपनी नौकरी छोड़ी तो वे उस समय जेएसडब्ल्यू पावर प्लांट में सीनियर मैनेजर पद पर थे। वहीं उनकी पत्नी तन्वी एक शिक्षक के तौर पर काम करती थीं। इस दंपति ने 2019 में जैविक खेती में काम करना शुरू किया। जब वे सुरक्षित कीटनाशक विकल्पों की तलाश कर रहे थे तो उनकी एक इंटरनेट सर्च के दौरान, मधुमक्खी पालन की जानकारी सामने आयी।
कृषि विज्ञान केंद्र से ली मदद
तन्वी के अनुसार अगर फसलों और सब्जियों में पर्याप्त परागण होता है तो उनका विकास और तेज हो सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) से मधुमक्खी पालन के निर्देश प्राप्त करने से पहले हमने खुद चीजों का परीक्षण करके शुरुआत की। उन्होंने इस जानकारी को अपने शहद ब्रांड 'स्वाद्य' में मिला दिया है, जो अब पूरे देश में प्रसिद्ध है। उन्होंने शहद के सिर्फ एक या दो लकड़ी के बक्से से शुरुआत की थी, जो बाद में 100 और फिर 500 हो गए। यानी उनका कारोबार बढ़ता गया।
दूसरे किसानों की मदद
कृषि जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक दंपति के अनुसार उन्होंने न केवल कच्चे शहद की बिक्री करके अपने बिजनेस को आगे बढ़ाया, बल्कि पास के एक खेत के किसानों को जैविक खेती में आने में मदद की। असल में यदि 3-4 किलोमीटर के दायरे में रसायन हों तो मधुमक्खियाँ तुरंत मर सकती हैं। दंपति का दावा है कि उनकी मधुमक्खियां पड़ोसी के खेत से रसायनों के कारण मर गईं थीं। इससे उन्हें लगभग 3,60,000 रुपये का नुकसान हुआ था।
रसायनों का उपयोग बंद करने को कहा
उन्होंने अपने मधुमक्खी के बक्सों को अगले सीज़न तक भूमि के दूसरी ओर ले जाने का फैसला किया। उन्होंने अपने पड़ोसी किसान को अपनी जमीन के तीन बीघा (एक बीघा 0.275 एकड़ के बराबर) पर रसायनों का उपयोग बंद करने के लिए कहा। उन्होंने मधुमक्खी पालकों से छत्ता खरीदने के बाद प्रत्येक लकड़ी के कंटेनर से आठ मधुमक्खी के छत्ते निकाले जिनमें प्रत्येक में 30,000 मधुमक्खियां थीं।
कितनी है कमाई
उनका एफएसएसएआई-प्रमाणित ब्रांड कच्चा शहद बेचता है जिसे प्रोसेस्ड नहीं किया गया है। हर महीने, वे लगभग 300 किलो शहद बेचते हैं और औसतन 9 लाख रुपये से 12 लाख रुपये के बीच का लाभ हर महीने कमाते हैं। इसे उनका सालाना प्रोफिट 1.4 करोड़ रु तक रहता है। तन्वी के अनुसार वर्ड-ऑफ-माउथ (केवल मुंह से बोल के) उनकी एकमात्र मार्केटिंग रणनीति रही, जिसका इस्तेमाल उन्होंने पूरे भारत से ऑर्डर प्राप्त करने के लिए किया।
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