नई दिल्ली, दिसंबर 14। आज के कामयाब बिजनेसमैन श्रीकांत बोला की कहानी फिल्मी लगती है। मगर ये हकीकत है। दरअसल जन्म से दृष्टिबाधित श्रीकांत को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उनके माता-पिता से लोगों ने कहा था कि वे उन्हें एक अनाथालय में छोड़ दें। मगर श्रीकांत को जीवन में बहुत कुछ करना था। श्रीकांत का जन्म 1992 में आंध्र प्रदेश के एक किसान परिवार में हुआ। उन्हें शिक्षकों और समाज ने काफी नजरअंदाज किया। उन्हें क्लास में सबसे पीछे बैठाया गया। मगर उनके माता-पिता ने बेटे के लिए काफी प्रयास किए। श्रीकांत में भी हमेशा से कुछ अलग करने की चाह थी। इसी चाह ने उन्हें जन्म से दृष्टिबाधित होने के बावजूद आज करोडों रु के बिजनेस का मालिक बना दिया।
साइंस से की पढ़ाई
साइंस में पढ़ने के अधिकार के लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। मगर आखिरकार जैसे तैसे उन्हें साइंस में शिक्षा हासिल करने की इजाजत मिली। उन्होंने 12वीं के बोर्ड में 98 फीसदी अंक हासिल किए। इससे उन्होंने सभी को चौंका दिया। मगर समाज ने उनकी क्षमता पर भरोसा नहीं किया। उन्होंने प्री-यूनिवर्सिटी परीक्षा पास की और आईआईटी का सपने देखा। मगर कोचिंग ने उन्हें अस्वीकार कर दिया जो जेईई प्रवेश परीक्षा पास करने के लिए आवश्यक हैं।
स्कॉलरशिप पर अमेरिका गए
श्रीकांत ने अमेरिका के टॉप टेक्नोलॉजी स्कूल एमआईटी के लिए आवेदन किया और वे नेत्रहीन सिलेक्ट होने वाले पहले अंतर्राष्ट्रीय छात्र बन गए। पढ़ाई पूरी करने के बाद वे चाहते तो वहीं रहकर आराम का जीवन जीते। मगर उन्होंने वापस भारत आने का फैसला किया और यहां आकर अपनी कंपनी की शुरुआत की। उन्होंने 9 साल पहले बोलेंट इंडस्ट्रीज की शुरुआत की।
150 करोड़ रु पहुंचा टर्नओवर
उनकी प्रतिभा को देश के दिग्गज कारोबारी रतन टाटा ने पहचाना और उनकी कंपनी में निवेश किया। बोलेंट इंडस्ट्रीज, जो पैकेजिंग सॉल्यूशन तैयार करती है, मजबूती से आगे बढ़ती गई। कंपनी ने 2018 तक 150 करोड़ रुपये के कारोबार हासिल किया। श्रीकांत की कंपनी के 5 मैन्युफैक्चरिंद प्लांट हैं और कंपनी ने 650 से अधिक लोगों को रोजगार दिया हुआ है। इनमें लगभग आधे लोग डिफ्रेंटली एबल्ड कैटेगरी से आते हैं।
खास लिस्ट में हुए शामिल
2017 में श्रीकांत को फोर्ब्स 30 अंडर 30 एशिया लिस्ट में जगह मिली। वे केवल तीन भारतीयों में से एक के रूप में इस लिस्ट में शामिल हुए थे। उन्होंने सीआईआई इमर्जिंग एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर 2016, ईसीएलआईएफ मलेशिया इमर्जिंग लीडरशिप अवार्ड जैसे कई अन्य अवॉर्ड हासिल किए।
बनना चाहते हैं राष्ट्रपति
2006 में एक भाषण के दौरान श्रीकांत उन छात्रों में से थे जिसे भारत के पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने संबोधित किया था। मिसाइल मैन ने उनसे सवाल किया था कि आप जीवन में क्या बनना चाहते हैं?। तब श्रीकांत ने जवाब दिया था कि मैं भारत का पहला नेत्रहीन राष्ट्रपति बनना चाहता हूं। बता दें कि हमारे देश में लगभग 2.21% आबादी विकलांग है, श्रीकांत बोला का दिक्कतों के खिलाफ सफलता हासिल करना एक प्रतीक और उदाहरण है। उन्होंने कहा था कि वे अपना जीवन कम्युनिटी और समाज सेवा के लिए समर्पित करना चाहते हैं। वे एक महान नेता के रूप में पहचान बनाना चाहते हैं।
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