Spices Cultivation: खाने में स्वाद भर देने वाले मसालों की अहमियत हर भारतीय घर समझता है लेकिन क्या आपको पता है कि जो मसाले आपके खाने में जान डाल देते हैं उनकी खेती भी आपको लखपति बना सकती है। इतना ही नहीं, आपको मसालों की खेती करने पर सरकार भी 40 % की सब्सिडी दे रही है।
आपको बता दें कि किसान हरियाणा से लेकर राजस्थान तक, बड़े पैमाने पर मसालों की खेती कर रहे हैं और बढ़िया मुनाफा कमा रहे हैं।
राजस्थान सरकार का उद्यानिकी विभाग की राज्य में मसालों की खेती और इसके क्षेत्र विस्तार के लिए किसानों को सब्सिडी दे रही है।

आप इस योजना का लाभ लेकर कम से कम खर्च करके 4 हेक्टेयर खेत में मसालों का बंपर उत्पादन ले सकते हैं।
किन मसालों की खेती कर सकते हैं आप
भारत मसालों का सबसे बड़ा उत्पादक, निर्यातक है। यहां खपत भी दूसरे देशों की तुलना में अधिक है। भारतीय किचन में सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले मसाले जैसे जीरा, इलायची, बड़ी इलायची, दालचीनी, हल्दी, मिर्च, धनिया जैसी मसाला व्यापार कर अपना कारोबार आप खड़ा कर सकते हैं।
यह एक ऐसा बिजनेस माना जाता है जिसमें आप कुछ ही महीनों में 1 से 2 लाख रुपए तक की इनकम उठा पाएंगे।
भारत सरकार द्वारा मसालों की खेती के लिए काफी अच्छी सब्सिडी भी प्राप्त कारवाई जा रही है। इस बिजनेस में आप एक बार निवेश करके काफी लंबे समय तक अच्छे पैसे कमा सकते हैं।
ध्यान रखें कि जब आप मसालों की खेती करें तो समय-समय पर फसलों की बुवाई करें और खेतों के पास उगी हुई खर-पतवार को साफ करते रहें।
कीटों के अलावा परभक्षी कीटों जैसे लेडी बर्ड बीटल का संरक्षण भी कर सकते हैं। इसके अलावा पीले-भूरे रंग के होते हैं और पत्तियों का रस चूसकर नुकसान करते हैं।
बचाव के लिए आप फसल को खरपतवार मुक्त या फिर अपने मसालों के खेत पर नायलॉन की जाली से ढक भी सकते हैं।
सरकार से मिलने वाली सब्सिडी का उठाएं फायदा
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आवेदन करने पर आरको अपनी आवश्यकतानुसार अधिकतम 4 हेक्टेयर और कम से कम 0.50 हेक्टेयर खेत के लिए अनुदान ले सकते हैं।
इतने एरिया में मसालों की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर की कुल लागत 13,750 रुपये निर्धारित की गई है, जिस पर 40 प्रतिशत सब्सिडी यानी 5,500 रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान मिल सकता है। इस स्कीम में आवेदन करने के लिए किसान के पास खुद की खेती योग्य जमीन, खेत की जमाबंदी, बिजली का बिल, आधार कार्ड, बैंक पासबुक की कॉपी और निवास प्रमाण पत्र होना चाहिए।
आपको बता दें कि मसालों का उत्पादन करने के लिए उद्यानिकी विभाग की तरफ से आर्थिक अनुदान के साथ-साथ तकनीकी सहयोग भी मुहैया करवाया जाएगा।
सिर्फ यही नहीं, मसालों की खेती के लिए किसानों को विभाग की तरफ से पैकेज ऑफ प्रेक्टिसेज का लीफलेट भी उपलब्ध करवाया जाएगा और पोषक तत्व, बीज, कीटनाशक आदि भी अनुदानित लागत पर उपलब्ध करवाए जाएंगे।
मसालों की खेती या फिर मसालों के लिए नया क्षेत्र विस्तार करने के लिए अपने जिला उद्यानिकी विभाग में संपर्क कर सकते हैं।
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