मोदी सरकार के फैसले के बाद देश का अगरबत्ती उद्योग आत्मनिर्भर बनने के लिए पूरी तरह तैयार है।
नई दिल्ली: मोदी सरकार के फैसले के बाद देश का अगरबत्ती उद्योग आत्मनिर्भर बनने के लिए पूरी तरह तैयार है। खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने बीते कल गुरुवार को कहा कि केंद्र सरकार ने बांस पर इंपोर्ट डयूटी को 10 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी करने का फैसला किया है।

सरकार के इस फैसले से अगरबत्ती इंडस्ट्री में अगले 8 से 10 महीनों में 1 लाख नई नौकरियां पैदा होंगी। अगरबत्ती उद्योग में बहुत सारे गांव लगे हुए हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की वजह से अगरबत्ती उद्योग आत्मनिर्भर बनेगा।
सरकार ने बांस के आयात पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई
वहीं केवीआईसी के चेयरमैन ने कहा कि सरकार के इस फैसले से अगरबत्ती के साथ बांस इंडस्ट्री को भी मजबूती मिलेगी। केंद्रीय एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने आयात को कम करने और स्थानीय इंडस्ट्री की ग्रोथ के लिए एक पहल शुरू की है। इसी पहल के तहत वित्त मंत्रालय ने हाल ही में बांस के आयात पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई है। बता दें कि भारत में चीन और वियतनाम से बांस का आयात होता है। इससे भारत में स्थानीय स्तर पर रोजगार का नुकसान होता है। इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी से मांग की आपूर्ति के लिए नई अगरबत्ती मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स की स्थापना का मार्ग तैयार होगा।
अगरबत्ती की खपत बढ़कर 1490 टन प्रतिदिन पहुंची
देश में अगरबत्ती का मांग के मुकाबले उत्पादन नहीं हो पा रहा है। अगरबत्ती की खपत बढ़कर 1490 टन प्रतिदिन पर पहुंच गई है। लेकिन स्थानीय स्तर पर केवल 760 टन प्रतिदिन का उत्पादन हो रहा है। मांग और उत्पादन के इस भारी अंतर के कारण रॉ अगरबत्ती का बड़े पैमाने पर आयात होता है। केवीआईसी के अनुसार, 2009 में जहां केवल 2 फीसदी रॉ अगरबत्ती का आयात होता था, वहीं 2019 में यह बढ़कर 80 फीसदी हो गया है। वहीं रुपयों के मामले में रॉ अगरबत्ती का आयात 2009 के 31 करोड़ के मुकाबले 2019 में 546 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। वहीं केवीआईसी का कहना है कि 2011 में यूपीए सरकार ने इंपोर्ट ड्यूटी को 30 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया था। इससे घरेलू अगरबत्ती उत्पादकों के सामने मुश्किल खड़ी हो गई थी। इसका नतीजा यह निकला कि करीब 25 फीसदी अगरबत्ती मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स बंद हो गई थीं।
हर साल भारत में 14.6 मिलियन टन बांस का उत्पादन
केवीआईसी ने दावा किया कि उसके आग्रह पर 31 अगस्त 2019 को वाणिज्य मंत्रालय ने अगरबत्ती के आयात को प्रतिबंधित श्रेणी में शामिल कर लिया था। भारत बांस उत्पादन में पूरी दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। इसके अलावा भारत बांस और इससे जुड़े उत्पादों के आयात के मामले में भी दूसरे स्थान पर है। भारत में हर साल 14.6 मिलियन टन बांस का उत्पादन होता है। इस काम से करीब 70 हजार किसान जुड़े हैं और बांस की 136 घरेलू किस्मों का उत्पादन होता है। 2018-19 में भारत में 210 करोड़ रुपए की बांस स्टिक का आयात हुआ था जो 2019-20 में बढ़कर 370 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। केवीआईसी के चेयरमैन ने कहा कि ड्यूटी में बढ़ोतरी से चीन से होने वाले आयात में कमी आएगी और स्थानीय उत्पादकों को बढ़ावा मिलेगा।
More From GoodReturns

प्री-अप्रूव्ड पर्सनल लोन का ऑफर आया है? 'Accept' दबाने से पहले ये गणित जरूर समझें

सोने में निवेश का सही फैसला: SGB, ETF या फिजिकल गोल्ड, आपके लिए क्या है बेस्ट?

Amazon-Flipkart सेल: बैंक ऑफर्स और EMI का सही गणित, शॉपिंग से पहले ये जरूर देखें

IPO रिफंड का पैसा खाली न छोड़ें: 2-4 दिनों के लिए निवेश के ये विकल्प हैं बेस्ट

Godrej Consumer Q1 Results: आज नतीजों के साथ डिविडेंड का धमाका? निवेशकों की नजरें इन 3 ट्रिगर्स पर

Shiprocket IPO: निवेश से पहले जानें UPI-ASBA की डेडलाइन और रिस्क, क्या FD से बेहतर है रिटर्न?

Jio का ₹10,000 वाला Freedom Pack: 15 महीने की वैलिडिटी और फ्री OTT, क्या है पूरी सच्चाई?

ITR रिफंड का पैसा आना शुरू: क्या आपके खाते में आया? तुरंत चेक करें ये 3 जरूरी चीजें

सरकारी बॉन्ड नीलामी: FD से बेहतर रिटर्न या जोखिम? जानें निवेश का सही तरीका

ब्रिटानिया के Q1 नतीजे आज: क्या बिस्कुट-केक के दाम बढ़ेंगे? निवेशकों की इन बातों पर टिकी नजर

TRAI का नया फरमान: अब रिचार्ज प्लान्स में नहीं छिपेगी कोई जानकारी, Jio-Airtel को देना होगा पूरा ब्यौरा



Click it and Unblock the Notifications