Shark Tank India : 13 साल की लड़की को मिली 50 लाख रु की फंडिंग, दिया कमाल का बिजनेस आइडिया

नई दिल्ली, फरवरी 15। कक्षा 8 की छात्रा अनुष्का जॉली को रियलिटी शो 'शार्क टैंक इंडिया' में अपने आइडिया के लिए फंडिंग मिली है। अपने बिजनेस आइडिया के लिए फंडिंग हासिल करने वाली जॉली सबसे कम उम्र की उद्यमी बन गयी हैं। उनकी आयु केवल 13 वर्ष है। वे इस शो में 'कवच' नाम के अपने एक एंटी-बुलिंग ऐप को पेश करने के लिए आई थीं। इसके लिए उन्हें 50 लाख रुपये की फंडिंग मिली है। कवच ऐप का उद्देश्य आसान और महत्वपूर्ण है और वो है पूरे देश में इसे फैलाना और जितना संभव हो बच्चों और स्कूलों तक खास तौर पर पहुंचना और उन्हें एंटी-बुलिंग के महत्व के बारे में शिक्षित करना। इस ऐप पर बुलिंग के खिलाफ देश भर में वेबिनार और आमने-सामने बातचीत भी की जाएगी।

बुलिंग की घटनाओं की रिपोर्ट

बुलिंग की घटनाओं की रिपोर्ट

कवच ऐप के जरिए छात्र और अभिभावक गुमनाम रूप रहते हुए ही बुलिंग की घटनाओं की रिपोर्ट कर सकेंगे। साथ ही इससे स्कूलों और परामर्शदाताओं को सूझबूझ से ऐसे मामलों में दखल देने और कार्रवाई करने का मौका मिलेगा। जॉली द पाथवे स्कूल, गुरुग्राम, में पढ़ती हैं। वे एंटी बुलिंग एम्बेसेडर्स का एक मजबूत नेटवर्क बनाना चाहती है, जो इस प्लेटफॉर्म और एप्लिकेशन के माध्यम से डायरेक्ट या इनडायरेक्ट रूप से प्रभावित लोगों की प्रोग्रेस को ट्रैक करेगा।

कैसे आया आइडिया

कैसे आया आइडिया

पर जॉली के दिमाग में यह आइडिया कैसे आया, इसके पीछे एक दिलचस्प घटना है। जॉली पहली बार बुलिंग करने वालों के खिलाफ खड़ी नहीं हुईं। उनके इस सफर की शुरुआत वर्षों पहले शुरू हुई। उन्होंने बुलिंग घटनाओं को झेला। पहली घटना तब हुई जब जॉली के दोस्तों ने रोते हुए उसका मज़ाक उड़ाया, ये एक ऐसा अनुभव रहा जिसका जिक्र उन्होंने 'शार्क टैंक इंडिया' शो में अपने आइडिया को पेश करते हुए किया।

'एंटी बुलिंग स्क्वॉड (एबीएस)'

'एंटी बुलिंग स्क्वॉड (एबीएस)'

इस घटना के बाद जॉली के सामने एक और घटना हुई, जब उन्होंने अपने साथी छात्रों को एक स्कूल समारोह के दौरान छह साल की एक बच्ची का मज़ाक उड़ाते देखा। इन डरावने अनुभवों ने जॉली को शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों की मदद से 'एंटी बुलिंग स्क्वॉड (एबीएस)' बनाने के लिए प्रेरित किया। जॉली ने अब तक 100 से अधिक स्कूलों और विश्वविद्यालयों के 2,000 से अधिक छात्रों की मदद की है।

एबीएस डिजिटल प्लेटफॉर्म

एबीएस डिजिटल प्लेटफॉर्म

13 साल की उम्र में जॉली तीन साल से अधिक समय से एबीएस डिजिटल प्लेटफॉर्म चला रही है। ये प्लेटफॉर्म लोगों को बुलिंग और उसके परिणामों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है। साथ ही इस तरह की घटनाओं को रोकने का संकल्प भी दिलाता है। एक रिपोर्ट के अनुसार जॉली उनका प्लेटफॉर्म एंटी बुलिंग सामान भी बेचता है।

ऐप को लेकर उत्साह

ऐप को लेकर उत्साह

अपने अनुभव के दौरान उन्होंने महसूस किया कि अधिकांश घटनाओं की सूचना नहीं मिलती है और इसलिए उनका समाधान नहीं होता। इसलिए उन्होंने इन घटनाओं की गुमनाम तौर पर रिपोर्ट करने के लिए एक एंटी बुलिंग रिपोर्टिंग मोबाइल ऐप 'कवच' बनाने का सोचा। एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और एक उद्यमी की 13 वर्षीय बेटी की योजना अपने इस सफर को आगे ले जाने की है। उनके आइडिया को शार्ट टैंक पर अच्छा रेस्पोंस मिला। दो जजों ने उनके ऐप में 50 लाख रुपये की वैल्यूएशन में निवेश करने के लिए प्रस्ताव रखा।

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