नई दिल्ली, मई 5। कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने छोटे व्यवसायों और एमएसएमई (सूक्ष्म और लघु और मध्यम उद्यम) को काफी प्रभावित किया है। कैश की दिक्कत का सामना कर रहे इन सेक्टरों पर दबाव कम करने के प्रयास में आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को कई अहम घोषणाएं कीं। एमएसएमई उद्यमियों को लोन देने के लिए फरवरी 2021 में शैड्यूल कमर्शियल बैंकों को सीआरआर की गणना के लिए उनके नेट डिमांड एंड टाइम लायबिलिटीज (एनडीटीएल) से नए एमएसएमई उधारकर्ताओं के लिए क्रेडिट की कटौती करने की अनुमति दी गई थी। अब उन एमएसएमई, जो बैंकिंग सिस्टम से बाहर हैं, को बैंकिंग सिस्टम में लाने के लिए ये छूट 1 अक्टूबर को खत्म होने वाले पखवाड़े के बजाय 31 दिसंबर 2021 तक बढ़ा दी गयी है। इसमें 25 लाख रु तक एक्सपोजर वाली एमएसएमई को शामिल किया जाएगा।

मिलेगा लोन रीस्ट्रक्चरिंग का फायदा
उधारकर्ताओं (व्यक्तियों, एसएमबी (स्मॉल एंड मीडियम बिजनेस) और एमएसएमई, जिनका कुल मिलाकर 25 करोड़ रुपये तक का एक्सपोजर है और जिन्होंने पहले के किसी भी लोन रीस्ट्रक्चरिंग का लाभ नहीं लिया है, वे रीस्ट्रक्चरिंग 2.0 के लिए पात्र होंगे। यानी वे चाहे तो अब अपना लोन रीस्ट्रक्चर यानी उसका पुनर्गठन कर सकते हैं।
कब तक आवेदन का मौका
प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत रिस्ट्रक्चरिंग के लिए 30 सितंबर तक आवेदन किया जा सकता है और फिर 90 दिनों के भीतर इसे लागू करना होगा। आरबीआई गवर्नर के अनुसार ये सुविधा लिमिट वन टाइम होगी। एक और अहम बात कि जिन उधारकर्ताओं ने पिछली बार लोन रिस्ट्रक्चरिंग (तब लोन चुकाने से 2 साल से कम तक की अवधि के लिए छूट दी गयी थी) का फायदा लिया, उन्हें बैंक इस विंडो का फायदा अब 2 साल तक के लिए दे सकते हैं।
छोटे फाइनेशिंयल बैंको को फायदा
आज किए गए अहम ऐलानों में आरबीआई गवर्नर ने स्मॉल फाइनेंस बैंकों के लिए बड़ी घोषणा की। आरबीआई गर्वनर के अनुसार 500 करोड़ रुपये तक साइज वाले माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशन (एमएफआई) को कर्ज देने वाले स्मॉल फाइनेंस बैंकों को प्राथमिकता वाले सेक्टरों में शामिल किया जाएगा। स्मॉल फाइनेंस बैंकों के लिए ये सुविधा 31 मार्च 2022 तक जारी रहेगी।
इकोनॉमी पर दबाव
इकोनॉमी पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि कोविड-19 की दूसरी लहर का इकोनॉमी पर प्रभाव बरकरार है। उनके अनसार ग्लोबल इकोनॉमी भी अनिश्चित लग रही है। आगे इसमें गिरावट आ सकती है।


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