Pickle Business : किचन से शुरू हुई कहानी विदेशों तक पहुंची, करोड़ों में है कमाई

नई दिल्ली, 31 अक्टूबर। भारत में अचार काफी पसंद किया जाता है। ये ऐसा खाने का आइटम है, जो लगभग हर घर में पूरे साल मिलता है। आम तौर पर अचार घर में ही तैयार किया जाता है। मगर समय के साथ अब लोग रेडीमेड अचार को भी खूब पसंद करते हैं। कुछ लोगों ने अचार का बिजनेस शुरू किया और कामयाब हो गए। आज हम आपके लिए ऐसे ही दो भाइयों की कहानी लेकर आए हैं, जिन्होंने घर के किचन से अपने अचार के बिजनेस की शुरुआत की, जो आज तक विदेशों तक पहुंच गया है। इतना ही नहीं उनकी कंपनी का कारोबार अब करोड़ों में है।

निलोन्स पिकल्स

निलोन्स पिकल्स

हम बात कर रहे हैं निलोन्स पिकल्स की। अब इसके कंपनी के प्रबंध निदेशक और सीईओ दीपक संघवी हैं। दीपक के अनुसार उनके पिता सुरेश संघवी और अंकल प्रफुल्ल ने 1962 में महाराष्ट्र के जलगांव के उतरन गांव में एक घरेलू रसोई से कारोबार शुरू किया था। 1962 में उनके पिता ने कृषि में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की, लेकिन उनके बड़े भाई प्रफुल्ल अपने पिता की असामयिक मृत्यु के कारण उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं कर सके।

कृषि में एंट्री की

कृषि में एंट्री की

प्रफुल्ल ने कृषि को अपनाया क्योंकि यह उनकी इनकम का एकमात्र स्रोत था। प्रफुल्ल ने अपने छोटे भाई और दीपक के पिता को एग्रीकल्चर प्रोसेसिंग में शिक्षा हासिल करने का सुझाव दिया। दीपक के अनुसार कि परिवार ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अपने अनुभव के कारण फूड प्रोसेसिंग की क्षमता को समझा था। वे कहते हैं कि हमारे परिवार के पास 1,500 एकड़ नींबू का बाग था। हमने घायल सैनिकों को इम्युनिटी और अन्य हेल्थ बेनेफिट प्रदान करने के लिए ब्रिटिश और भारतीय सेना के लिए नींबू सिरप और नींबू के रस का उत्पादन किया। उनके परिवार ने उत्पाद का निर्यात भी किया और अच्छी कमाई की।

परिवार को हुआ नुकसान

परिवार को हुआ नुकसान

महाराष्ट्र कृषि भूमि (जोत की सीमा) अधिनियम, 1961 के कारण, भूमि जोत पर प्रतिबंध लगाने के लिए सरकार द्वारा लागू एक कदम से परिवार ने अपनी 90 फीसदी से अधिक भूमि खो दी। वे बाकी जमीन पर खेती करते रहे। फिर दोनों भाइयों ने मिल कर जेली, जैम, केचप और अन्य उत्पाद तैयार किए। मगर उन्हें इनमें सफलता नहीं मिली। उन्होंने 50 प्रोडक्ट पेश किए। मगर कामयाबी फिर भी नहीं मिली।

अचार ने दिलाई कामयाबी

अचार ने दिलाई कामयाबी

1966 में दोनों ने अपने घर का बना अचार पेश किया, तो चीजें बदलने लगीं। उस समय सरकार सैन्य कैंटीनों में अपने उत्पादों को बेचने के लिए कंपनियों को आमंत्रित कर रही थी। तो भाइयों ने सभी चार प्रकार के अचार के लिए आवेदन किया, जिनमें मिर्च, आम, मिक्स और नींबू शामिल था। बिजनेस एक छोटा सेटअप होने के कारण कीमतें बहुत किफायती थीं। सौभाग्य से उन्होंने अगले कुछ सालों के लिए चारों तरह के अचार के लिए कॉन्ट्रैक्ट हासिल कर लिए।

450 करोड़ रु तक पहुंची कंपनी

450 करोड़ रु तक पहुंची कंपनी

आज दीपक की कंपनी का टर्नओवर 450 करोड़ रु है। ग्रामीण आबादी को रोजगार देने के लिए निलोन्स के तीन कारखाने हैं। ये सभी जलगांव में हैं। कंपनी अमेरिका, ब्रिटेन, मध्य पूर्व, अफ्रीका और अन्य सहित 30 देशों को अपने प्रोडक्ट निर्यात भी करती है। दीपक का कहना है कि कंपनी की योजना पूरे भारत में रिटेल आउटलेट्स में अपनी उपस्थिति 5 लाख से बढ़ाकर 40 लाख करने की है।

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