नयी दिल्ली। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में कहा है कि एनबीएफसी (नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी) सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को बढ़ाया जा सकता है, जो सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए एक बड़ा समर्थन साबित होगा। दरअसल एनबीएफसी के पास निवेश के रूप में पैसा आएगा, जिसे वे एमएसएमई को लोन के रूप में देंगी। इससे एनबीएफसी और एमएसएमई दोनों सेक्टरों को फायदा हो सकता है। गडकरी ने कहा कि मौजूदा चुनौतीपूर्ण समय के दौरान एमएसएमई को समर्थन देने के लिए एनबीएफसी, राज्य सहकारी बैंकों, जिला सहकारी बैंकों, क्रेडिट सोसायटी आदि को मजबूत करना आवश्यक है।

क्या होगा फायदा
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार गडकरी ने आधिकारिक बयान में कहा है कि एनबीएफसी को मजबूत करने के लिए एफडीआई को बढ़ावा दिया जा सकता है, जिससे एमएसएमई को अधिक सहारा मिलेगा। उन्होंने कहा कि एनबीएफसी के लिए एक क्रेडिट रेटिंग सिस्टम भी तैयार किया जा सकता है। उनके मुताबिक एनबीएफसी सेक्टर में विदेशी निवेश हासिल करने के लिए संभावना को तलाशने की जरूरत है। गडकरी के अनुसार किसी एनबीएफसी की रेटिंग अच्छी है तो यह बेहतर हो सकता है ऐसी कंपनी विदेशी निवेश को आकर्षित कर सके। लेकिन इसके लिए मापदंड तय किए जाने चाहिए।
एमएसएमई का जीडीपी में कितना है योगदान
इस समय भारत में लगभग 6.34 करोड़ एमएसएई इकाइयाँ हैं, जो विनिर्माण जीडीपी में लगभग 6.11 फीसदी और सर्विस जीडीपी में करीब 24.63 फीसदी योगदान करती हैं। वहीं देश के विनिर्माण उत्पादन में इनका योगदान 33.4 फीसदी। ये 11 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार भी प्रदान करती हैं। इसीलिए सरकार इस सेक्टर के लिए लगातार उपाय कर रही है। पिछले महीने भी 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज में से एमएसएमई को काफी कुछ दिया गया। इतना ही नहीं सरकार ने एमएसएमई को तरह के नियमों में भी ढील दी है। सरकार ने एमएसएमई का विस्तार करने के लिए इसकी परिभाषा में भी बदलाव कर दिया है।


Click it and Unblock the Notifications