नयी दिल्ली। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए एक सस्ती, तेज़ और आसान इन्सॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस (दिवालिया समाधान प्रक्रिया) बहुत जल्द लाई जाएगी। इस बात की जानकारी इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया (आईबीबीआई) के कार्यकारी निदेशक केआर साजी कुमार ने दी है। कुमार के अनुसार बोर्ड ने एमएसएमई दिवाला रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस के लिए वर्तमान 180 दिनों की तुलना में कम समय सीमा तय करने का सोचा है। साथ ही कम लागत और आसान प्रोसेस को शामिल किया जाएगा। नई प्रोसेस में देनदार लेनदारों के साथ बातचीत करते हुए कारोबार का प्रबंधन करना जारी रखेगा।

उच्च लागत नहीं होनी चाहिए लागू
एमएसएमई के लिए दिवालिया प्रोसेस में कम समय का फायदा होना चाहिए। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार कुमार ने कहा कि यह 180 दिन नहीं हो सकता, बल्कि उससे कम हो सकता है। साथ ही ये पूरी प्रोसेस सस्ती होनी चाहिए, जिसका मतलब है कि लागत बहुत कम होगी। कुमार ने कहा कॉर्पोरेट देनदारों के मामले में इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन की उच्च लागत को यहां लागू नहीं किया जाना चाहिए। 'Debtor in Possession' मॉडल लागू होगा, जहां देनदारों के पास बिजनेस प्रबंधन होगा।
निर्मला सीतारमण ने किया था ऐलान
17 मई को आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एमएसएमई को महामारी और लॉकडाउन से बचाने के लिए दिवालिया प्रक्रिया के लिए सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ा कर 1 करोड़ रुपये कर दी थी। उन्होंने यह भी घोषणा की थी कि एमएसएमई के लिए एक विशेष इन्सॉल्वेंसी फ्रेमवर्क लाया जाएगा, जिसे इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड की धारा 240ए के तहत अधिसूचित किया जाएगा।
एमएसएमई जाएंगी दिवालिया अदालत
एक्सपर्ट कहते हैं कि इन प्रावधानों से संभवत एमएसएमई को आईबीसी की धारा 10 के तहत दिवालिया अदालत में जाने में मदद मिलेगी। न्यायिक व्यवस्था के तहत इससे सुनिश्चित किया जा सकेगा कि कोई भी गड़बड़ी न हो। बीते सोमवार को साजी कुमार ने कहा कि आईबीबीआई ने इस मामले पर हितधारकों से परामर्श किया था और अंतिम फैसले के लिए सरकार के पास रिपोर्ट पेश करने वाली है।


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