MSME : कर्मचारियों के लिए मुसीबत, कंपनियों के लिए जॉब से निकालना हुआ आसान

नयी दिल्ली। एमएसएमई सेक्टर (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों) से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। हालांकि ये कर्नाटक राज्य से संबंधित है। कर्नाटक सरकार श्रम कानूनों में संशोधन को अधिसूचित करने के लिए तैयार है। इसमें एमएसएमई के लिए कर्मचारियों को नौकरी पर रखना और वित्तीय संकट की स्थिति में कंपनी बंद करना आसान हो जाएगा। मगर एक कर्मचारियों के लिए बुरी खबर है ये है कि नए नियमों में एमएसएमई के लिए काम कर रहे लोगों के लिए निकालना भी आसान हो जाएगा। संशोधन श्रमिकों के लिए अधिक ओवरटाइम (ओटी) घंटे की सुविधा होगी। साथ ही कॉन्ट्रैक्ट आधार पर श्रमिकों को रखा जाएगा।

इसलिए उठाया गया कदम

इसलिए उठाया गया कदम

सरकार ने एमएसएमई सेक्टर के मनोबल को बढ़ाने के लिए ये फैसला लिया है। बता दें कि औद्योगिक विवाद अधिनियम, कारखानों और बॉयलर अधिनियम और अनुबंध श्रम अधिनियम और संबंधित नियमों में संशोधन किया गया है। अभी तक अगर किसी फर्म के पास 100 कर्मचारी थे तो एमएसएमई को छंटनी, संख्या घटाने और कारोबार बंद करने के लिए सरकारी अनुमति लेने की आवश्यकता थी। अब इस सीमा को अब 300 कर्मचारियों तक बढ़ा दिय गया है ताकि एमएसएमई आने वाले श्रम नियमों से डरे बिना अधिक लोगों को काम पर रख सकें या वित्तीय संकट की स्थिति में इकाइयों को बंद कर सकें।

नया निवेश होगा आकर्षित

नया निवेश होगा आकर्षित

राज्य के श्रम मंत्री शिवराम हेब्बार के अनुसार श्रम नियमों में दी ढील से नए निवेशों को आकर्षित करने और उद्योगों को अधिक लोगों को रोजगार देने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। राष्ट्रपति ने कर्नाटक द्वारा भेजे गए श्रम अध्यादेशों को स्वीकार कर लिया है और सरकार उन्हें बहुत जल्द सूचित करेगी। पांच अन्य राज्यों ने भी अपने श्रम कानूनों में समान बदलाव किए हैं। हेब्बार के अनुसार हम कोरोना महामारी के कारण कठिन समय से गुजर रहे हैं। यूनियनों को संदेह है कि हम उन्हें कमजोर करने के लिए कानूनों को उदार बना रहे हैं। मगर ये सही नहीं है। हमारा उद्देश्य कर्नाटक में अधिक निवेश लाना और अधिक रोजगार बढ़ाना है।

अधिक रखे जाएंगे कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी

अधिक रखे जाएंगे कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी

किए गए संशोधनों में किसी तिमाही में ओवरटाइम (ओटी) घंटे की सीमा को 75 घंटे से बढ़ा कर 125 घंटे कर दिया गया है। साथ ही कॉन्ट्रैक्ट पर रखे जाने वाले श्रमिकों की संख्या को 20 से बढ़ा कर 50 कर दिया गया है। एक्सपर्ट कहते हैं कि पहले का कानून औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए एक रोड़ा था। सरकार को ओटी घंटे या ठेका श्रमिकों को काम पर रखने के मामले में नहीं पड़ना चाहिए। इन महत्वपूर्ण पहलुओं पर नियमों में संशोधन से अधिक एमएसएमई स्थापित होंगी, जिससे रोजगार में बढ़ोतरी होगी।

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