नई दिल्ली, जून 27। हर किसी के जीवन में कठिन समय आता ही है। पर कामयाब वो व्यक्ति होता है, जो चुनौतियों का सामना कर सके। चुनौतियों से निपट कर ही एक सफल जीवन की कहानी तैयार की जा सकती है। कुछ ऐसी ही कहानी एक हरियाणा के एक व्यक्ति की, जिसने दिहाड़ी मजदूरी तक की। मगर हिम्मत नहीं हारी और फिर उसकी मेहनत रंग लाई। आज की तारीख में वो एक कामयाब बिजनेसमैन है। जानते हैं पूरी कहानी।
कैसा रहा सफर
ये कहानी है हरियाणा के अरविंद की। अरविंद का जन्म हरियाणा के रोहतक में हुआ था। उनके पिता एक सिविल ठेकेदार थे। मगर उनके पिता का कारोबार नुकसान में था। इससे अरविंद के परिवार के सामने आर्थिक दिक्कतें थीं। परिवार को अपना घर बेच कर एक कमरे के घर में शिफ्ट होना पड़ा। इस एक कमरे के मकान में अरविंद दो भाई-बहनों और माता-पिता के साथ रहते थे। छोटी उम्र में ही अरविंद पर बड़ी जिम्मेदारी आ गयी। परिवार की तंगी ने उन्हें कमाने पर मजबूर कर दिया।
दिहाड़ी मजदूरी से की शुरुआत
2001 में सोलह वर्ष की आयु में अपनी शिक्षा के दौरान अरविंद ने दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करना शुरू कर दिया। प्रतिदिन 50 रुपये की उनकी डेली इनकम ने उन्हें अपनी व्यक्तिगत वित्तीय जरूरतों को पूरा करने और कई बार परिवार को सपोर्ट करने में मदद की। जीवन कठिन था पर अरविन्द के पास जो कुछ भी था वे उसी में हमेशा खुश रहते। पर परिवार की हालत निराशाजनक थी।
दिहाड़ी मजदूर से बने डीजे
बीस साल की उम्र तक अरविंद की संगीत में रुचि बनी और कुछ लोकल संगीतकारों से दोस्ती के चलते वे दिन भर की मेहनत के बाद वह अपने दोस्तों के साथ डीजे पार्टियों में जाने लगे। उन दिनों रोहतक में डीजे का नया चलन था। लोग अपने कार्यक्रमों के लिए किराये पर डीजे बुलाते थे। अरविन्द को डीजे प्रोफेशन आकर्षक लगा। मगर ये उनकी आखिरी मंजिल नहीं थी। एक डीजे के रूप में अच्छा काम करने के बावजूद अरविंद नए बिजनेस एरिया के बारे में जानने के इच्छुक थे।
एल्युमीनियम ट्रस का बिजनेस
अरविंद इवेंट मैनेजमेंट इंडस्ट्री के कई लोगों को जानते थे। केनफोलियोज की रिपोर्ट के अनुसार जल्द ही उनकी मुलाकात दिल्ली में एल्युमिनियम ट्रस के एक व्यापारी से हुई। अरविंद ने एल्युमीनियम ट्रस पर रिसर्च करना शुरू किया और शुरुआती काम में करीब 10 लाख रुपये खर्च किए। बिजनेस की बेहतर समझ के बाद उन्होंने बिजनेस लोन लिया और एल्यूमीनियम ट्रस बनाने के लिए एक छोटी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी तैयार की। तब से अरविंद की कंपनी डेविल ट्रस छोटे-बड़े आयोजनों के लिए ट्रस का निर्माण और सप्लाई कर रही है। 2019 में डेविल्स ट्रस को मुंबई में भारत में बेस्ट ट्रसिंग कंपनी का पुरस्कार मिला।
15 करोड़ रु टर्नओवर
आज उनकी कंपनी का टर्नओवर 15 करोड़ रु है। अरविंद दो 'पी' के फॉर्मूले के साथ जीवन जीते हैं - हठ (परसिस्टेंट) और दृढ़ता (पर्सवीरन्स)। उन्हें लगता है कि आपके सपने कितने भी अवास्तविक क्यों न हों, सही दिशा में दृढ़ता आपको अपने लक्ष्य के करीब ले जाएगी और आपको उन्हें हासिल करने में सक्षम बनाएगी।
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