नयी दिल्ली। केंद्र सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं। कई तरह की फंडिंग स्कीम भी शुरू की हैं। मगर बहुत कम लोग जानते हैं कि सरकार की तरफ से कुछ बिजनेस के लिए ट्रेनिंग देने का भी ऐलान किया गया है। सरकार की तरफ से बिजनेस के लिए आपको पैसा और जरूरी सामान भी दिया जाएगा। बीते गुरुवार को एमएसएमई मंत्रालय दो योजनाओं (मिट्टी के बर्तनों यानी Pottery और मधुमक्खी पालन) के लिए नए दिशानिर्देश तैयार किए हैं। आइए जानते हैं क्या होगा इन छोटे कारोबार करने वालों को फायदा।
कारोबार के लिए मिलेगा सामान और ट्रेनिंग
मिट्टी के बर्तनों के कारोबार के लिए सरकार मिट्टी के बर्तनों बनाने के लिए व्हील या चाक (Pottery Wheel), मिट्टी को मिलाने वाला यंत्र और एक पीसने वाला यंत्र दिया जाएगा। साथ ही स्वयं सहायता समूहों में मिट्टी के बर्तनों के पारंपरिक कारीगरों और गैर-पोटरी कारीगरों को भी मिट्टी के बर्तनों की ट्रेनिंग दी जाएगी। यह मिट्टी के बर्तनों के कारीगरों का उत्पादन और तकनीकी जानकारी को बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। साथ ही इस पहल का मकसद कम लागत पर नए उत्पाद बनाना भी है। प्रशिक्षण और आधुनिक / स्वचालित उपकरणों के माध्यम से मिट्टी के बर्तनों के कारीगरों की इनकम भी बढ़ेगी।
सरकार ने किया पैसों की मदद का ऐलान
कुल 6,075 पारंपरिक और अन्य (गैर-पारंपरिक) मिट्टी के बर्तनों के कारीगर / ग्रामीण बेरोजगार युवा / प्रवासी मजदूर इस योजना से लाभान्वित होंगे। वर्ष 2020-21 के लिए वित्तीय सहायता के रूप में 6,075 कारीगरों की मदद के लिए 19.50 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। मंत्रालय की स्फूर्ति योजना के तहत टेरकोटा, लाल मिट्टी पोटरी में क्लस्टर तैयार करने के लिए 50 करोड़ रु की अतिरिक्त सहायता राशि का प्रोविजन किया गया है। इससे क्रॉकरी / टाइल बनाने की क्षमता के लिए मिट्टी के बर्तन बनाने में नई वैल्यू वर्धित उत्पाद तैयार होंगे।
मधुमक्खी पालन के लिए ऐलान
मधुमक्खी पालन के लिए सरकार मधुमक्खी बक्से और टूल किट देगी। इस योजना के तहत मधुमक्खी के छत्तों के साथ मधुमक्खी बक्से दिए जाएंगे। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान जिलों में प्रवासी श्रमिकों को ये सहायता दी जाएगी। शुरुआत में इस योजना को के तहत 2020-21 के दौरान कुल 2050 मधुमक्खी पालनकर्ताओं, उद्यमी, किसान, बेरोजगार युवा आदिवासियों को कवर किया जाएगा। इन सभी को योजना / कार्यक्रम से लाभ मिलेगा। इस उद्देश्य के लिए 2020-21 के दौरान 13 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता का ऐलान किया गया है। इससे 2050 लोगों को फायदा मिलेगा।


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