नयी दिल्ली। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्री नितिन गडकरी ने कोरोना महामारी के खिलाफ देश की लड़ाई में एमएसएमई सेक्टर के योगदान की सराहना की है। विशेष रूप से व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) किट और सैनिटाइज़र के उत्पादन के संबंध में मंत्री ने दावा किया कि भारत ने दोनों उत्पादों के मामले में सरप्लस हासिल कर लिया है। यानी देश में इन दोनों चीजों की जरूरत से ज्यादा उत्पादन हो रहा है, जिसके चलते अब इनका निर्यात भी किया जा रहा है। एमएसएमई का देश की जीडीपी में भी बड़ा योगदान है। इस सेक्टर से 8 करोड़ से अधिक लोगो को रोजगार मिलता है। यह सेक्टर 6000 से अधिक उत्पादों का उत्पादन करने के लिए जाना जाता है और इसका जीडीपी में योगदान लगभग 8 फीसदी है। इसके अलावा कुल विनिर्माण (Manufacturing) उत्पादन इसका योगदान लगभग 45 फीसदी और भारत के निर्यात में 40 फीसदी है।

पीपीई किट का होता था आयात
फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार एक वीडियो कॉन्फ्रेंस में इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स के सदस्यों को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा दो महीने पहले भारत चीन से पीपीई किट का आयात कर रहा था। लेकिन आज एमएसएमई इंडस्ट्री रोज 5 लाख पीपीई किट बना रही है। उदाहरण के लिए नागपुर क्लस्टर में 17 साझेदार हैं। एमएसएमई मंत्रालय के सहयोग से क्लस्टर शानदार काम कर रहा है। आज कलस्टर प्रति दिन 10,000-12,000 पीपीई किट बना रहा है।
कपड़ा मंत्री ने दी थी जानकारी
पिछले महीने कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने भारत में पीपीई किट उत्पादन पर अपडेट दी थी। ईरानी ने 18 मई को ट्वीट के जरिए बताया था कि भारत रोज 4.5 लाख से अधिक पीपीई किट का उत्पादन कर रहा है। पीपीई की मैन्युफेक्चरिंग के लिए 600 से अधिक कंपनियों की लैब प्रमाणित थी। एक किट में हेल्थकेयर वर्कर्स जैसे डॉक्टर, नर्स आदि द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला गाउन, ग्लव्स, शू कवर, मास्क और आई शील्ड शामिल होती हैं।
सेनिटाइजर पर खास ध्यान
भारत कोरोना महामारी से लड़ने के लिए सैनिटाइज़र का उत्पादन बढ़ाने में भी सक्षम रहा। गडकरी के अनुसार जब महामारी शुरू हुई तो सैनिटाइजर के रेट 1,200 रुपये प्रति लीटर थे। लेकिन उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र आदि में सभी चीनी मिलों और इथेनॉल कंपनियों से (सैनिटाइज़र उत्पादन के लिए) अनुरोध किया गया और राज्य सरकार से उन्हें खाद्य और दवा लाइसेंस देने का अनुरोध किया गया। अब सैनिटाइज़र का रेट 160 रुपये प्रति लीटर है और इसका निर्यात भी किया जा रहा है।


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