नयी दिल्ली। देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने एमएसएमई सेक्टर के लिए 3 लाख करोड़ रुपये की इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) के तहत 8,700 करोड़ रुपये का लोन बांट दिया है। सरकार ने कोरोनोवायरस के कारण लगाए गए लॉकडाउन से एमएसएमई सेक्टर के लिए आए वित्तीय संकट से निपटने के लिए 3 लाख करोड़ रु की ईसीएलजीएस योजना का ऐलान किया था। वित्त मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार एसबीआई और अन्य बैंकों ने एमएसएमई और बिजनेस एंटरप्राइजेज को सहारा देने के लिए गारंटीड इमरजेंसी क्रेडिट लाइन (जीईसीएल) लोन स्कीम की शुरुआत की। मालूम हो कि पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित किए गए 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज में सबसे बड़ा हिस्सा ईसीएलजीएस का ही है।
क्या है ईसीएलजीएस स्कीम का फायदा
इस योजना के तहत जीईसीएल सुविधा के रूप में एलिजिबल यानी पात्र एमएसएमई और मुद्रा योजना के इच्छुक उधारकर्ताओं को 3 लाख करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त फंडिंग दी जा रही है, जिसकी 100 फीसदी गारंटी राष्ट्रीय क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी (एनसीजीटीसी) लेगी। एसबीआई ने एक बयान में कहा है कि इसने 1.5 लाख एमएसएमई फर्म्स के लिए 15,000 करोड़ रुपये का लोन पास कर दिया है। इसमें से एसबीआई ने अब तक 8,700 करोड़ रुपये के लोन वितरित भी कर दिया है। एसबीआई के मुताबिक एमएसएमई की सहायता के लिए और भी उपाय किए जा रहे हैं जिनमें कोविड इमरजेंसी क्रेडिट लाइन, वर्किंग कैपिटल लिमिट का पुनर्मूल्यांकन और एडवांसेज का पुनर्गठन शामिल है।
16000 करोड़ रु से अधिक लोन बंटा
वित्त मंत्रालय के अनुसार 12 जून तक सरकारी बैंक 3 लाख करोड़ रुपये की ईसीएलजीएस योजना के तहत एमएसएमई को 16,031.39 करोड़ रुपये का लोन बांट चुके हैं, जबकि कुल 32,049.86 करोड़ रुपये का लोन पास किया जा चुका है। सरकारी बैंकों ने ये लोन 1 जून से देना शुरू किया है। 21 मई को कैबिनेट ने एमएसएमई सेक्टर के लिए ईसीएलजीएस के माध्यम से 9.25 प्रतिशत की रियायती दर पर 3 लाख करोड़ रुपये तक के अतिरिक्त फंडिंग को मंजूरी दी थी। ये स्कीम 3 लाख करोड़ रुपये तक के लोन या 31 अक्टूबर तक (जो भी पहले हो) चलेगी।
अर्थव्यवस्था के लिए अहम है एमएसएमई सेक्टर
भारत की अर्थव्यवस्था के लिए जो महत्वपूर्ण फैक्टर हैं उनमें से एक है सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई)। एमएसएमई सेक्टर में 3.6 करोड़ यूनिट्स शामिल हैं। इस सेक्टर से 8 करोड़ से अधिक लोगो को रोजगार मिलता है। यह सेक्टर 6000 से अधिक उत्पादों का उत्पादन करने के लिए जाना जाता है और इसका जीडीपी में योगदान लगभग 8 फीसदी है। इसके अलावा कुल विनिर्माण (Manufacturing) उत्पादन इसका योगदान लगभग 45 फीसदी और भारत के निर्यात में 40 फीसदी है।
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