नई दिल्ली, जुलाई 10। शहर में रहते हुए आप क्या सोचते हैं? एक कामयाब लाइफ के लिए बढ़िया जॉब हो और ऊंची सैलेरी। अगर ऐसा हो तो आप शहर की लाइफ में खो जाएंगे। मगर हर कोई इससे संतुष्ट नहीं होता। कुछ लोग ऐसी लाइफ छोड़ कर अपना बिजनेस शुरू करने की सोचते हैं। वहीं कुछ लोग इस सिटी लाइफ से ऊब जाते हैं। इन्हीं कुछ लोगों में से बहुत थोड़ लोग अपने सपनों की तलाश में नौकरी छोड़ने का जोखिम लेते हैं और कामयाबी हासिल करते हैं। यहां हम आपको एक ऐसी ही लड़की की कहानी बताएंगे, जिसने बैंगलोर की सिटी लाइफ छोड़ एक अलग ही रास्ता चुना।
लाखों की थी नौकरी
प्रतिभा कृष्णैया की लाइफ परफेक्ट थी। उनके पास एक अच्छी नौकरी और मासिक लाखों की नौकरी थी। लेकिन बैंगलोर की इस लड़की ने गाँव में रहने की अपनी कल्पना को पूरा करने के लिए शहर की लाइफ छोड़ दी। वह अब एक सोशल बिजनेस चलाती है, जिससे 200 से अधिक महिलाओं को आजीविका मिलती है। वे खुद भी अच्छी कमाई कर रही हैं।
लाइफ से नहीं थी संतुष्ट
सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट होने के बाद प्रतिभा ने मीडिया एजेंसी थॉमसन रॉयटर्स में काम करना शुरू कर दिया, जहां उन्हें सालाना सात अंकों का वेतन मिलता था। उन्होंने आठ साल तक वहां काम करना जारी रखा। मगर प्रतिभा असल में संतुष्ट नहीं थी और चाहती थी कि वह शहर की हलचल से दूर एक गाँव में हो। एक किसान की बेटी होने के नाते, प्रतिभा ने अपने पिता के गृहनगर मैसूर में समय बिताने का आनंद लिया। उन्होंने महसूस किया कि उन्हें अपना जीवन बदलने की जरूरत है।
सूझ-बूझ भरा कदम
गांव में सेटल होने के अपने सपने को प्रतिभा ने चतुराई से पूरा किया। उनका सिलेक्शन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की यूथ फॉर इंडिया फेलोशिप (एसबीआई-वाईएफआई) के लिए हो गया। फेलोशिप युवाओं को 13 महीनों के लिए भारत के विभिन्न दूरदराज के गांवों में विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के साथ काम करने का अवसर देती है। प्रतिभा 2014 में उत्तराखंड के खेतीखान गांव में चली गईं।
शुरुआत में हुई दिक्कत
भौगोलिक बदलाव, भाषा और सांस्कृतिक मतभेद से उन्हें शुरू में दिक्कत हुई। मगर प्रतिभा को जल्दी ही खेतीखान से प्यार हो गया। उन्होंने देखा कि गाँव की महिलाएँ बुनाई और क्रोकेट में कुशल थीं, इसलिए प्रतिभा ने उनकी मदद करने का फैसला किया और एक स्वयं सहायता समूह की स्थापना की। 2015 तक, दस महिलाएं समूह में शामिल हो गईं और स्कार्फ और क्लिप से लेकर बैग और बच्चों के कपड़े तक सब कुछ बुन रही थीं और क्रॉचिंग कर रही थीं, जिसे बैंगलोर में प्रदर्शित किया गया।
लाखों में पहुंचा टर्नओवर
उन्होंने हिमालयन ब्लूम्स ब्रांड की स्थापना की। इस पहल की सफलता को देखते हुए और भी महिलाएं प्रतिभा से जुड़ गईं। और अब हिमालयन ब्लूम्स के साथ काम करने वाले लगभग 40 गांवों की करीब 200 महिला कारीगरों का एक नेटवर्क है। पहले वर्ष में ही इस गैर-लाभकारी सामाजिक उद्यम का कारोबार 4.5 लाख रुपये था, जो वित्तीय वर्ष 2020-21 में 4 गुना यानी करीब 18 लाख रु तक बढ़ गया। उनके उत्पाद पूरे भारत में बेचे जाते हैं जिनमें मुंबई, दिल्ली, बैंगलोर शहर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और जापान शामिल हैं। केनीफोलियोज की रिपोर्ट के अनुसार यह पूछे जाने पर कि क्या वह शहरी जीवन का कुछ याद आता है। प्रतिभा ने स्वीकार किया अपने परिवार और दोस्तों के अलावा, मुझे गांवों से ज्यादा प्यार है।
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