नयी दिल्ली। केंद्र सरकार ने 31 अगस्त तक इंडस्ट्रीज के लिए लोन अधिस्थगन (लोन ईएमआई टालना) की मोहलत दी थी। अब ये मोहलत 31 अगस्त को खत्म हो रही है इसलिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएमएमई) सेक्टर से इसे आगे बढ़ाने की मांग सामने आने लगी है। उद्योग के प्रतिनिधियों ने कहा कि एमएसएमई के वे 80 फीसदी मालिक जिन्होंने कर्ज लिया था अपना बकाया भुगतान करने की स्थिति में नहीं हैं। मार्च में राष्ट्रीय स्तर पर लॉकडाउन लगाया गया था, जिसे देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने लोन चुकाने के मामले में मई तक तीन महीने की मोहलत दी थी। बाद में इस मोहलत को और तीन महीने के लिए अगस्त तक बढ़ा दिया गया था।

1 साल की मोहलत चाहते हैं एमएसएमई फोरम्स
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार लोन ईएमआई पर मिली मोहलत खत्म होने वाली है और एमएसएमई फोरम्स एक साल के लिए लोन स्थगन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। कोयम्बटूर सिडको इंडस्ट्रियल एस्टेट मैन्युफैक्चरर्स वेलफेयर एसोसिएशन (कोसीमा) के अध्यक्ष पी नल्लथम्बी ने कहा कि एस्टेट में औद्योगिक इकाइयां श्रमिकों और ऑर्डर की कमी के कारण अपनी क्षमता के 40%-50% पर काम कर रही हैं। उनके अनुसार हमारे लिए बकाया भुगतान करना मुश्किल होगा।
बैंक कर रहे फोन
बैंकरों ने फर्म्स को फोन करना शुरू कर दिया है और डेबिटिंग के लिए खाते में पर्याप्त बैलेंस रखने को कहा है। सरकार की तरफ से पेश की गई इमरजेंसी लोन स्कीम के तहत 1 लाख करोड़ रु से ज्यादा का लोन बांटा जा चुका है। वहीं पास की गई लोन राशि 1.5 लाख करोड़ रु ज्यादा है। इसके अलावा सरकार ने दबावग्रस्त फर्म्स के लिए 20000 करोड़ रु के फंड ऑफ फंड्स की भी शुरुआत कर दी है। मगर एमएसएमई फर्म्स के सामने समस्या लोन चुकाने की है।


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