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MSME : अगरबत्ती बनाने की स्कीम शुरू, जानिए फायदे की बात

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नयी दिल्ली। सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय ने अगरबत्ती बनाने वाले कामगारों के लाभ और गाँव के उद्योग को डेवलप करने के लिए 'ग्रामोदय विकास योजना' के तहत एक प्रोग्राम शुरू किया है। प्रोग्राम के अनुसार शुरू में चार पायलट प्रोजेक्ट आरंभ किए जाएंगे, जिसमें देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में एक प्रोजेक्ट शामिल होगा। कारीगरों के प्रत्येक लक्षित समूह को लगभग 50 ऑटोमैटिक अगरबत्ती बनाने की मशीन और 10 मिक्सिंग मशीनें दी जाएंगी। यानी कारीगरों को कुल 200 ऑटोमैटिक अगरबत्ती बनाने की मशीन और 40 मिक्सिंग मशीनें प्रदान की जाएंगी।

'अगरबत्ती' का घरेलू प्रोडक्शन बढ़ेगा
 

'अगरबत्ती' का घरेलू प्रोडक्शन बढ़ेगा

इस घोषणा पर एक बयान में मंत्रालय ने कहा है कि आयात नीति में 'अगरबत्ती' आइटम को "मुक्त" व्यापार से "प्रतिबंधित" व्यापार में रखने और 'गोल बांस की छड़ों', जिनका इस्तेमाल अगरबत्ती बनाने में किया जाता है, पर आयात शुल्क को 10 प्रतिशत से बढ़ा कर 25 प्रतिशत करने के बाद सरकार की नई घोषणा से अगरबत्ती का घरेलू प्रोडक्शन बढ़ेगा। इसके साथ ही ग्रामीण रोजगार जनरेट करने का रास्ता तैयार होगा। इससे स्वदेशी 'उत्पादन और मांग' के बीच अंतर कम होगा और देश में 'अगरबत्ती' के आयात भी घटेगा।

दी जाएगी ट्रेनिंग

दी जाएगी ट्रेनिंग

इसके अलावा खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी), जो एमएसएमई मंत्रालय के तहत काम करता है, इस क्षेत्र में काम करने वाले कारीगरों को अगरबत्ती निर्माण मशीनों के लिए ट्रेनिंग और सहायता देगा। केवीआईसी देश में खादी संस्थानों / अगरबत्ती निर्माताओं के साथ पार्टनरशिप करेगा। इसके जरिए वो अगरबत्ती बनाने वाले कारीगरों को काम और कच्चा माल उपलब्ध कराएगा। आपको जान कर हैरानी हो सकती है कि देश में अगरबत्ती की मांग की तुलना उत्पादन कम है। अगरबत्ती की देश में खपत बढ़ कर 1490 टन प्रतिदिन पहुंच गई। लेकिन उत्पादन केवल 760 टन प्रतिदिन है। सरकार का मकसद इस अंतर को घटाना है।

रोजगार के ढेरों मौके
 

रोजगार के ढेरों मौके

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अगरबत्ती व्यापार के लिए इस योजना से सरकार का उद्देश्य 1 लाख नौकरी पैदा करना भी है। जून में केंद्र सरकार ने बांस पर आयात शुल्क 10 फीसदी से बढ़ा कर 25 फीसदी कर दिया था। सरकार के इस फैसले से अगरबत्ती उद्योग में अगले कुछ महीनों में 1 लाख नौकरियां जनरेट होंगी। असल में अगरबत्ती उद्योग में बहुत सारे गांव हैं। इससे पहले केवीआईसी के चेयरमैन ने कहा था कि सरकार के इस फैसले से अगरबत्ती और बांस इंडस्ट्री को मजबूती मिलेगी। भारत में बांस का सालाना उत्पादन 1.46 करोड़ टन है। करीब 70 हजार लोग इससे जुड़े हुए हैं। देश में बांस की 136 किस्मों का उत्पादन होता है।

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English summary

MSME Government started scheme for those making agarbatti know the benefits

The Khadi and Village Industries Commission (KVIC), which works under the Ministry of MSME, will train and support artisans working in this field for incense sticks manufacturing machines.
Story first published: Tuesday, August 4, 2020, 14:41 [IST]
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