नयी दिल्ली। कोरोनावायरस महामारी पर काबू पाने के लिए सरकार ने लॉकडाउन लगाया था। मगर इससे कारोबार ठप्प हो गए थे। एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) सेक्टर को भी काफी झटका लगा था। एमएसएमई सेक्टर को इस झटके से उबारने के लिए सरकार ने कई उपाय किए, जिनमें 3 लाख करोड रु की इमरजेंसी लोन स्कीम पेश करना शामिल है। मगर अब एमएसएमई संगठनों का कहना है कि सरकार की तरफ से उठाए गए इन उपायों से सेक्टर को बहुत अधिक प्रोत्साहन नहीं मिला है। देश में 6 करोड़ से अधिक एमएसएमई फर्म्स में कार्यरत लगभग 20-30 प्रतिशत कर्मचारी पिछले 4 महीने में बेरोजगार हो गए हैं।

फंड की कमी बरकरार है
एमएसएमई फर्म्स के पास फंड की बरकरार है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार 60 फीसदी से अधिक एमएसएमई यूनिट्स के पास अपने मौजूदा कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पर्याप्त फंड नहीं है। मांग में कमी, लिक्विडिटी की कमी, कैश फ्लो में देरी और वर्कफोर्स की कमी से एमएसएमई सेक्टर काफी प्रभावित हुआ है, जबकि ये सेक्टर सबसे बड़े एम्प्लोयर्स में से एक है और भारत की जीडीपी में इसका लगभग 30 प्रतिशत का योगदान है।
करीब 20 करोड़ लोगों को मिलता है रोजगार
एमएसएमई संगठनों का कहना है कि हालांकि एमएसएमई क्षेत्र में नौकरियों की वास्तविक संख्या पर कोई सरकारी डेटा नहीं है, मगर कम से कम 20 करोड़ लोग इस सेक्टर के माध्यम से अपनी आजीविका हासिल कर रहे हैं। भारतीय एसएमई चैंबर के अध्यक्ष चंद्रकांत सालुंके के अनुसार अधिकांश यूनिट्स लगभग 30-35 प्रतिशत वर्कफोर्स के साथ काम कर रही हैं। सभी कंपनियों को कच्चे माल की आपूर्ति में समस्या आ रही है।
निर्यात ऑर्डरों में आई है कमी
कच्चा माल उपलब्ध हैं लेकिन इसके लिए नकदी की जरूरत है और एमएसएमई के पास नकदी नहीं है। निर्यात ऑर्डर धीमे हो गए हैं। इसलिए मुख्य रूप से निर्यात करने वाली कंपनियां विनिर्माण नहीं कर रही हैं। वे एमएसएमई फर्म्स, जो इन निर्यातकों को आपूर्ति करती थीं, उन्हें भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में आरबीआई के एक सर्वे ने भी इस क्षेत्र में दबाव की ओर इशारा किया, जिसके कई कारण है। इनमें कैश फ्लो में कमी, कम मांग, वर्कफोर्स की कमी, कार्यशील पूंजी और पूंजी की कमी शामिल हैं।


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