नयी दिल्ली। एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) सेक्टर के लिए कोरोना महामारी के बाद दिक्कतें बहुत बढ़ गई हैं। इनमें एक समस्या थी सरकारी विभागों और सरकारी कंपनियों पर रुका हुआ भुगतान। मगर इसमें से 75 फीसदी पैसा एमएसएमई को दिया जा चुका है। एमएसएमई मंत्रालय के सचिव एके शर्मा के अनुसार सरकार और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सरकारी कंपनियों) के पास रुका हुआ पैसा छोटे व्यवसायों के लिए पूंजी संकट का सबसे बड़ा कारण रहा है। उन्होंने एक कार्यक्रम में बताया कि जुलाई महीने में बकाया राशि चुकाने के लिए ऑनलाइन रिपोर्टिंग सिस्टम के माध्यम से एमएसएमई को करीब 75 फीसदी बकाया पैसा अदा कर दिया गया है।

स्टेट लेवल पर लागू होगा ये सिस्टम
शर्मा के अनुसार सरकार इस सिस्टम को राज्य स्तर पर भी लाने की कोशिश कर रही है। जीएसटी स्वीकृति के 45 दिनों के भीतर सरकारी संगठनों, विभागों आदि से एमएसएमई को भुगतान में देरी की रिकवरी को सक्षम करने के लिए सरकार के एक विशेष निगरानी पोर्टल एमएसएमई समाधान को अक्टूबर 2017 में लॉन्च किया गया था।
3 लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन हुए
उन्होंने ये भी कहा कि जुलाई और अगस्त में एमएसएमई के पंजीकरण के लिए नए लॉन्च हुए पोर्टल पर 3 लाख से अधिक एमएसएमई रजिस्ट्रेशन किए गए हैं। इस पोर्टल को उदयम रजिस्ट्रेशन कहा जाता है। छोटे व्यवसायों के लिए खुद को पेपरलेस और स्व-घोषणा के आधार पर रजिस्टर्ड करने के लिए जुलाई में इस पोर्टल लॉन्च किया गया था। इस पोर्टल से एमएसएमई को एक रजिस्ट्रेशन नंबर मिलता है जिसके बाद पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। एमएसएमई मंत्रालय ने जुलाई में एक बयान में कहा था कि प्रमाणपत्र में एक QR कोड होगा, जिसके माध्यम से पंजीकरण पोर्टल पर नए उद्यमों के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
ऐसे मिलती है जानकारी
इस पोर्टल के जरिए पैन और जीएसटी संबंधित व्यवसाय की निवेश और टर्नओवर जैसी जानकारी सरकारी डेटाबेस से ऑटोमैटेड रूप से कैप्चर की जाती है। एके शर्मा के अनुसार रजिस्ट्रेशन करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है क्योंकि अधिक इकाइयों से पंजीकरण करने का आग्रह किया गया है।


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