MSME : दांव पर लगी करोड़ों नौकरियां, नकदी की कमी बरकरार

नयी दिल्ली। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) सेक्टर कोरोनवायरस वायरस महामारी से जूझ रहा है। इस बीच एक सर्वे सामने आया है जो एमएसएमई सेक्टर की खस्ता हालत को दर्शाता है। सर्वे में जून अंत तक एमएसएमई सेक्टर में 2.5-3 करोड़ नौकरियों के नुकसान का अनुमान लगाया है। साथ ही अगले महीने तक और 1-1.5 करोड़ नौकरियां जाने की बात कही गई है। खरीदारों की तरफ से पेमेंट में देरी के कारण एमएसएमई के पास कैश की कमी है। जून में हुई सर्वे में शामिल 37 प्रतिशत फर्म्स ने कहा कि उन्होंने बचे रहने के लिए सैलेरी में 50 प्रतिशत की कटौती करनी पड़ी। हालांकि थोड़े अच्छे संकेत भी दिखे हैं। अप्रैल के सबसे खराब महीने के बाद से सेक्टर में कारोबार की स्थिति में मामूली सुधार हुआ है। उस समय 42 फीसदी फर्म्स ने कर्मचारियों के वेतन को आधे से कम करना चाहा था।

हायरिंग हो गई शुरू

हायरिंग हो गई शुरू

बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के अनुसार सर्वे में बताया गया है कि एमएसएमई सेक्टर में थोड़ी-बहुत हायरिंग शुरू हो गई है। व्यवसाय फिर से शुरू हो रहे हैं, मगर वे पूरी तरह से तनावग्रस्त हैं। जहां तक सरकारी मदद का सवाल है तो आत्मनिर्भर पैकेज के तहत एमएसएमई के लिए 3 लाख करोड़ रुपये की आर्थिक मदद का ऐलान किया गया। सावधि लोन और टैक्स के लिए मिली मोहलत से जूझ रहे एमएसएमई सेक्टर के हाथ में थोड़ा पैसा आया है। हालांकि सर्वे ये भी बताता है कि बड़ी संख्या में एमएसएमई फर्म्स को अभी भी क्रेडिट की जरूरत है क्योंकि 3 लाख करोड़ रुपये के पैकेज ने केवल 19 प्रतिशत मांग को ही पूरा किया है।

बढ़ सकते हैं एनपीए

बढ़ सकते हैं एनपीए

ये सर्वे उद्योग निकाय फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो एंड स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज , स्कॉच ग्रुप, भारतीय हित सलाहकार समिति (BVSS) और टैक्स लॉ एजुकेयर सोसायटी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है। इसके अलावा एमएसएमई सेक्टर में एनपीए में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। 61 प्रतिशत से अधिक एमएसएमई ने कहा कि मोहलत अवधि खत्म होने पर है कि वे सितंबर से डेब्ट चुकाने की स्थिति में नहीं हैं। जबकि 37 फीसदी एमएसएमई फर्म्स चाहती हैं कि मोहलत को 6 महीने और बढ़ाया जाए। पिछले महीने 32 फीसदी उत्तरदाताओं ने 1 साल का एक्सटेंशन दिए जाने की बात कही थी।

क्या है एमएसएमई के लिए असल समस्या

क्या है एमएसएमई के लिए असल समस्या

एमएसएमई की समस्याओं में कॉर्पोरेट और सरकारी संस्थाओं से भुगतान में देरी शामिल है, जिससे उनके फाइनेंस पर दबाव पड़ रहा है। अप्रैल-जून के दौरान हुए एक सर्वे में सामने आया था कि कैश फ्लो और विलंबित भुगतान एक बड़ी समस्या बने हुए हैं। सरकारी भुगतान और टैक्स रिफंड पूरी तरह से असंतोषजनक हैं। जून में 35 फीसदी एमएसएमई ने कहा कि उन्हें आपूर्ति के लिए 90-180 दिनों में भुगतान मिला, जबकि 24 प्रतिशत ने दावा किया कि उनका बकाया 180 दिनों से अधिक समय से लंबित है।

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