नयी दिल्ली। बैंकों ने पिछले महीने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तरफ से घोषित की गई 100 फीसदी इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम के तहत माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) को फंड देना शुरू कर दिया है। लेकिन लॉकडाउन से झटका खाई कई फर्मों के लिए क्रेडिट अभी भी एक बड़ी चुनौती है। अच्छे क्रेडिट इतिहास वाली बेहतर क्षमता वाली कंपनियां तो फंड जुटाने में सक्षम हैं। लेकिन सबसे ज्यादा जरूरतमंद एमएसएमई फर्म को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है, जिनमें मांग में गिरावट और फाइनेंस की कमी शामिल है। आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि 18 जून तक सरकारी बैंकों ने सरकारी योजना के तहत 40,416 करोड़ रुपये के लोन पास किए हैं, जिसमें से 21,028.55 करोड़ रुपये के लोन बांट दिए हैं। दरअसल इस योजना से पहली बार के कर्जदारों और बैड अकाउंट वालों को बाहर रखा गया है। दबाव वाली एमएसएमई के लिए एक अलग योजना शुरू की जानी बाकी है।
कारखाने की जमीन, प्लांट और मशीनरी है गिरवी
बैंक इस योजना के तहत लोन देने के लिए नई गारंटी नहीं मांग रहे हैं। मगर बैंक यह क्रेडिट सुविधा सिर्फ मौजूदा उधारकर्ताओं को ही दे रहे हैं, इसलिए उनके कारखाने की जमीन, प्लांट और मशीनरी ज्यादातर बैंकों के पास ही गिरवी रखी हैं। जहां तक इस लोन पर ब्याज दर का सवाल तो ये लगभग बाजार दरों के बराबर ही है और इसमें रियायत नहीं है। ये एमएसएमई के लिए अच्छी चीज नहीं है। पिछले महीने आरबीआई ने रेपो दर में 40 बेसिस पॉइंट्स की कटौती कर इसे 4 प्रतिशत के रिकॉर्ड निचले स्तर तक कम कर दिया था। मगर इसका फायदा उधारकर्ताओं को नहीं दिया जा रहा है।
कितनी है ब्याज दर
इस योजना के तहत बैंक और वित्तीय संस्थानों की ब्याज दर में 9.25 प्रतिशत प्रति वर्ष है, जबकि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) अधिकतम 14 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से कर्ज दे सकती हैं। वहीं सरकारी बैंक उधारकर्ता की क्रेडिट योग्यता के आधार पर लगभग 8 प्रतिशत पर लोन दे रहे हैं। इंडस्ट्री सूत्रों का कहना है कि इस तरह की उच्च दरें दबाव वाली उन कंपनियों के लिए क्रेडिट को मुश्किल बनाती हैं, जिन्हें अपनी लंबे समय से बंद पड़ी इकाइयों के लिए वर्किंग कैपिटल लोन की आवश्यकता है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सस्ते कर्ज के साथ एमएसएमई को निश्चित लागत कम करने और बिजली शुल्क की छूट जैसे छोटी अवधि वाले फायदों में सरकारी समर्थन की आवश्यकता है। वरना बहुत सी फर्म्स नहीं बचेंगी और उन्हें कारोबार बंद करना होगा।
ये भी हैं दिक्कतें
एमएसएमई के सामने सरकार की योजना के तहत लोन में कई दिक्कतें आ रही हैं। पहली चीज जैसा कि जिक्र किया जा चुका है किे ये सुविधा सिर्फ मौजूदा उधारकर्ताओं के लिए है और दूसरी लोन लेने के लिए एमएसएमई के लिए लंबी कागजी कार्यवाही से गुजरना पड़ रहा है। इस वजह से बहुत सी फर्म्स लोन लेने में चूक जाती हैं। पिछले सप्ताह जारी एक रिपोर्ट में क्रिसिल रेटिंग ने कहा कि एमएसएमई की इनकम और मुनाफे में गिरावट की संभावना है, जिसमें सूक्ष्म उद्यमों को सबसे तगड़ा झटका लगेगा।
सूक्ष्म उद्यमों का कुल एमएसएमई लोन में 32 प्रतिशत हिस्सा है। इनमें कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी, निर्माण, निर्यात संबंधी और कपड़ा और चीनी मिट्टी की चीज़ों वाली कंपनियों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ रहा है।
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