MSME : कॉलेज ड्रॉप-आउट ने खड़ा किया 52 करोड़ रु का बिजनेस, जानिए कैसे

नई दिल्ली, जुलाई 1। अकसर नौजवानों पर परिवार की जिम्मेदारी कम उम्र में ही आ जाती है। परिवार की आर्थिक दिक्कतों के कारण ऐसे लोग न तो अपनी पढ़ाई पूरी कर पाते हैं, न अपने सपने। उनके कंधे फिर सिर्फ परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार रहते हैं। मगर इनमें से कुछ लोग अपनी मेहनत और प्लानिंग से काफी ऊपर पहुंचते हैं। एक ऐसी ही कहानी आज यहां हम आपके लिए लेकर आए हैं।

तैयार किया शानदार बिजनेस

तैयार किया शानदार बिजनेस

हम बात कर रहे हैं 27 वर्षीय श्रेय बंसल की। उनका परिवार एक समय असफल बिजनेस के कारण गुजारा करने के लिए बी संघर्ष कर रहा था। तब श्रेय कुछ कठिन निर्णय और जोखिम लेने के लिए मजबूर हो गए। मगर खुद पर उनका विश्वास बहुत अधिक था। केवल तीन सालों में श्रेय पारिवारिक बिजनेस को नयी ऊंचाइयों पर ले गए।

नेपाल से आया भारत परिवार

नेपाल से आया भारत परिवार

श्रेय का परिवार मूल रूप से नेपाल से है। मगर वे बेहतर जीवन की तलाश में 1989 में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी चले आए। मगर भारत आकर भी परिवार के जीवन में बहुत कुछ नहीं बदला। श्रेय के दादाजी और पिताजी ने काली इलायची का कारोबार किया। उनके पिता नेपाल से इलायची आयात करते थे और फिर इसे दिल्ली के कुछ व्यापारियों को बेचते थे।

एक्टर बनने की थी चाहत

एक्टर बनने की थी चाहत

श्रेय की अपने पारिवारिक बिजनेस में कोई दिलचस्पी या ज्ञान नहीं था। इसलिए उन्होंने दूसरे रास्ते तलाशने का फैसला किया। उन्हें एक्टिंग का शौक था। वे क्राइस्ट यूनिवर्सिटी से बीबीएम (बैचलर ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट) करने के लिए बैंगलोर चले गए। मगर उनकी और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी इसलिए उन्हें कॉलेज बीच में छोड़ना पड़ा। फिर उन्होंने 2014 में कुछ अतिरिक्त पैसे कमाने के लिए बैंगलोर में एक छोटा सा कैफे शुरू किया। लेकिन वह भी विफल रहा।

आखिरकार परिवार के बिजनेस से जुड़े

आखिरकार परिवार के बिजनेस से जुड़े

अपनी स्थिति से निराश 2017 में श्रेय सिलीगुड़ी वापस चले आए और अपने परिवार के व्यवसाय में जुड़ने का फैसला किया। जब वह 2017 में सिलीगुड़ी लौटे तो उनका एकमात्र इरादा अपने परिवार की मदद करना था। श्रेय ने यह पता लगाने में समय बिताया कि वह कैसे अपने पारिवारिक बिजनेस को ऊंचाई तक ले जा सकते हैं। उन्होंने पाया कि इलायची का उपयोग व्यावहारिक रूप से सबसे अधिकतर तैयार मसालों में किया जाता है।

क्या आया आइडिया

क्या आया आइडिया

उनका परिवार केवल स्थानीय व्यापारियों को इलायची बेचता था, जो केवल थोड़ी मात्रा में ही खरीदारी करते थे। मगर श्रेय ने आइडिया खोजा और उन कंपनियों के संपर्क किया जो तैयार मसाले बनाती थी और उनके साथ सहयोग किया। ये कंपनियां बड़ी मात्रा में इलायची खरीदती थीं। इससे उन्हें तगड़ा मुनाफा हुआ। केनोफोलियोज की रिपोर्ट के अनुसार श्रेय के लिए कंपनियों को राजी करना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने उन्हें सबसे प्रीमियम उत्पाद देने का वादा किया। श्रेय अपनी कामयाबी को लेकर इतने दृढ़ थे उन्होंने कई रिश्तेदारों से 5 करोड़ रुपये का भारी कर्ज लिया। उनहोंने भारत की 18 प्रमुख मसाला बनाने वाली कंपनियों के साथ करार किया। अब उनके कारोबार का टर्नओवर 52 करोड़ रुपये का है।

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