नयी दिल्ली। कोरोना संकट के बीच लगभग हर आर्थिक गतिविधि में दिक्कतों के बावजूद पिछले दो महीनों में यूपी के राजस्व संग्रह में अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई है। राज्य में अर्थव्यवस्था के सुधार के संकेत के रूप में एक और अच्छी खबर आई है। यूपी में एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) सेक्टर की करीब 90 फीसदी फर्म्स ने फिर से काम शुरू कर दिया है। इससे राज्य को आर्थिक मोर्चे पर बेनेफिट होगा। बीते गुरुवार को राज्य के एमएसएमई अतिरिक्त मुख्य सचिव नवनीत सहगल ने मुख्यमंत्री कार्यालय को एक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें बताया गया कि एमएसएमई सेक्टर की 9,30,348 इकाइयों में से 8,18,088 इकाइयों ने अनलॉकिंग की शुरुआत के बाद से अपनी पूरी क्षमता से काम करना शुरू कर दिया है।

खूब मिल रहे रोजगार के अवसर
असल में एमएसएमई सेक्टर राज्य में नौकरियों के भी खूब अवसर पैदा कर रहा है। एमएसएमई सेक्टर जरूरतमंदों के लिए सबसे अधिक जॉब देने वाला सेक्टर बन गया है। इस सेक्टर से अब तक 51,77563 निवासी श्रमिकों और विस्थापित प्रवासियों को नौकरी मिली है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार सहगल के मुताबिक रोजगार देने के मामले में एमएसएमई सबसे आगे है। साथ ही इस सेक्टर ने 1 लाख करोड़ रु का निर्यात दर्ज किया है।
जरूरी सामान किया गया तैयार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कोरोना के समय में दवाओं, पीपीई किट और लोगों के लिए आवश्यक अन्य वस्तुओं के उत्पादन के लिए लॉकडाउन के दौरान अच्छी संख्या में एमएसएमई फिर से खुलीं। सहगल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में देश के एमएसएमई सेक्टर की सबसे ज्यादा 14 फीसदी हिस्सेदारी है। उन्होंने ये भी कहा कि राज्य आर्थिक मोर्चे पर वसूली की राह पर है और एमएसएमई क्षेत्र इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
बाकियों के लिए छोटी समस्याएं
राज्य में एमएसएमई की 90 प्रतिशत इकाइयों ने काम करना शुरू कर दिया है और शेष भी जल्दी ही काम शुरू करेंगी। बाकियों के सामने कार्यशील पूंजी आदि जैसे मामूली मुद्दें हैं, जिन्हें हल करना होगा। इन इकाइयों के लिए लोन सुनिश्चित करने के लिए विभाग बैंकों के साथ बातचीत कर रहा है।


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