नयी दिल्ली। राज्य सरकारों की तरफ से एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) को लोन देने के आंकड़े थोड़े चौंकाने वाले रहे हैं। इस लिस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य गुजरात योगी आदित्यनाथ के यूपी से पिछड़ गया। आम तौर पर ऐसे मामलों में यूपी को थोड़ा पीछे माना जाता है, मगर एमएसएमई को लोन देने वाले राज्यों की सूची में यूपी ने दूसरा स्थान हासिल किया है। वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार 5 जून तक सरकारी बैंकों ने 17,705.64 करोड़ रुपये के लोन पास किए हैं, जबकि इनमें से 8,320.24 करोड़ रुपये के लोन आवंटित किए हैं। इनमें यूपी ने 43,541 खातों के लिए 1,960.97 करोड़ रुपये का लोन पास किया है, जबकि इनमें से 21,728 खातों को 852.05 करोड़ रुपये का लोन आवंटित कर दिया गया है। वहीं गुजरात ने 1,696.23 करोड़ रुपये के लोन पास किए हैं। ये लोन 100 प्रतिशत आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) के तहत कोरोना संकट के दौरान एमएसएमई को सहारा देने के लिए दिए जा रहे हैं।
क्या है ईसीएलजीएस
ईसीएलजीएस कोरोना संकट के लिए एक रेस्पोंस योजना है, जिसका मकसद एमएसएमई को राहत देना है। इसके जरिए कम लागत पर 3 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त लोन दिया जाएगा ताकि एमएसएमई अपने व्यवसाय को फिर से शुरू कर सकें। कोरोना के कारण लगाए गए लॉकडाउन की वजह से कारोबारों पर काफी निगेटिव असर पड़ा है। इनमें एमएसएमई सेक्टर भी काफी प्रभावित हुआ है। इस योजना के तहत बैंकों और फाइनेंस कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले लोन पर नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी (एनसीजीटीसी) 100 फीसदी गारंटी लेती है। ये लोन 31 अक्टूबर तक 100 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाली एमएसएमई और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के उधारकर्ताओं को मिलेगा।
पहले पायदान पर रहा तमिलनाडु
वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार तमिलनाडु ने एमएसएमई को लोन देने के मामले में पहला स्थान हासिल किया है। तमिलनाडु ने 33,725 खातों को ईसीएलजीएस के तहत 2,018.89 करोड़ रुपये के लोन को मंजूरी दी गई है, जबकि अब तक 1,325.04 करोड़ रुपये का लोन 18,867 खातों में आवंटित किया जा चुका है। इसके अलावा महाराष्ट्र ने 1,316.29 करोड़ रुपये, आंध्र प्रदेश ने 1,015.24 करोड़ रुपये और राजस्थान ने 955 करोड़ रुपये के लोन पास किए हैं।
एमएसएमई की इकोनॉमी में भूमिका
एमएसएमई भारतीय अर्थव्यवस्था की बैकबोन बन गई है। ईसीएलजीएस योजना से लगभग 45 लाख एमएसएमई को लाभ मिलने की उम्मीद है, जो कोरोना लॉकडाउन से लगे आर्थिक झटके से निपटने में मदद करेगा। इस लोन की घोषणा सरकार की तरफ से 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज के दौरान की गई थी। बता दें कि 1 जून को यूनियन कैबिनेट की बैठक हुई थी, जिसमें एमएसएमई की परिभाषा में बदलाव को मंजूरी दे दी गई। अब मध्यम उद्यमों के लिए टर्नओवर की सीमा को बढ़ाकर 250 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इस फैसले के पीछे सरकार का लक्ष्य एमएसएमई के दायरे का विस्तार करना है। 1 करोड़ रुपये के निवेश और 5 करोड़ रुपये के टर्नओवर वाले उद्यमों को अब सूक्ष्म उद्यम माना जाएगा। 10 करोड़ रुपये से कम के निवेश और 50 करोड़ रुपये से कम टर्नओवर वाले कारोबार को अब छोटे उद्यमों की कैटेगरी में रखा जाएगा। वहीं 50 करोड़ रुपये के निवेश और 250 करोड़ रुपये के कारोबार वाली इकाइयों को मध्यम उद्यम माना जाएगा।
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