भारत-चीन विवाद : MSME के लिए बढ़ सकती है मुसीबत, जानिए कैसे

नयी दिल्ली। अर्थव्यवस्था में चल रही मंदी से एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) सेक्टर के सामने पहले से ही कई चुनौतियां थीं। इसके बाद कोरोनावायरस और लॉकडाउन ने इस सेक्टर की मुसीबतें और बढ़ा दीं। सरकार ने पिछले महीने 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज में एमएसएमई सेक्टर के लिए 3 लाख करोड़ रु की फंडिंग का ऐलान किया था। इसके अलावा कई वैधानिक नियमों में बदलाव के जरिए सरकार ने इस सेक्टर को राहत पहुंचाने के उपाय किए। मगर अब एमएसएमई सेक्टर के लिए एक नई मुसीबत आ गई है। दरअसल पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प का असर दोनों देशों के बीच कारोबार पर भी दिखने लगा है। चीन के साथ कारोबार प्रभावित होने का देश के एमएसएमई सेक्टर पर निगेटिव असर पड़ सकता है।

एमएसएमई की परेशानी की वजह

एमएसएमई की परेशानी की वजह

केंद्र सरकार ने चीन को कारोबार के मोर्चे पर चोट देनी शुरू कर दी है। मगर छोटे कारोबारियों की तरफ से एमएसएमई सेक्टर के लिए चिंता जाहिर की है। दरअसल एमएसएमई सेक्टर के कारोबारियों का कहना है कि दोनों देशों के बीच तनाव से इम्पोर्ट ड्यूटी यानी आयात शुल्क में वृद्धि या सामानों पर नॉन-टैरिफ बैरियर को रखने से उनकी इनपुट कॉस्ट में 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है। पहले से कोरोना संकट का सामना कर रही छोटी कंपनियों के लिए इससे हालात और बिगड़ सकते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार चीनी 300 वस्तुओं पर आयात शुल्क में वृद्धि कर सकती है।

सोच-समझ कर हो फैसला

सोच-समझ कर हो फैसला

दरअसल यदि चीन से आयात बंद हुआ तो इनपुट लागत में कई गुना इजाफा हो सकता है। कारोबारियों का कहना है कि दक्षिण कोरिया, जापान और यूरोप से कच्चे माल का आयात उन्हें बहुत महंगा पड़ेगा। एमएसएमई सेक्टर की चिंता और भी है। सेक्टर की तरफ से सरकार को लंबे समय के लिए मजबूत योजना बनाने की सलाह दी गई है, जो चीन द्वारा आयात का नया विकल्प बने। इसके अलावा अखिल भारतीय निर्माता संगठन (एआईएमओ) ने सरकार को चीन के विरुद्ध जनभावना के लिहाज से फैसले न लेने को कहा है।

फैसलों में चालाकी जरूरी

फैसलों में चालाकी जरूरी

फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो एंड स्माल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एफआईएसएमई) के ​​अध्यक्ष कहते हैं कि तर्कसंगत तरीके से सोचना होगा और आयात शुल्क बढ़ाने या चीनी उत्पाद का बहिष्कार करने के लिए चालाकी से आगे बढ़ना होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लगभग 70 फीसदी एक्टिव फार्मास्यूटिकल्स इन्‍ग्रेडिएंट्स (एमपीआई) का आयात चीन से होता है, जो फार्मा सेक्टर की रीढ़ है। अगर ये रुका तो देश में दवाओं की लागत काफी बढ़ जाएगी। इससे देश के गरीब और निम्न वर्ग काफी बुरा असर पड़ेगा। हालांकि कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) ने भारत और चीन के बीच सीमा पर चल रहे तनाव के मद्देनजर मेड इन चाइना प्रोडक्ट्स का बहिष्कार करने का आह्वान किया है। इसके लिए सीएआईटी ने 500 से अधिक चीनी उत्पादों की लिस्ट भी जारी की है। इस लिस्ट में खिलौने, कपड़े, वस्त्र, परिधान, रसोई के सामान, फर्नीचर, हार्डवेयर, जूते, हैंडबैग, लगेज, इलेक्ट्रॉनिक्स, कॉस्मैटिक्स और गिफ्ट आइटम, घड़ियां, रत्न और आभूषण, स्टेशनरी, कागज, स्वास्थ्य उत्पाद और ऑटो पार्ट्स शामिल हैं।

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