नयी दिल्ली। वित्त मंत्रालय के अनुसार सरकारी बैंकों ने 3 लाख करोड़ रुपये की इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) के तहत देश भर में 71 एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) हब को 19,668.87 करोड़ रुपये का लोन मंजूर कर दिया है। कोरोना से एमएसएमई सेक्टर को काफी तगड़ा झटका लगा है। इसीलिए सरकार ने 20 लाख करोड़ रु के राहत पैकेज में एमएसएमई के लिए खास लोन स्कीम पेश की थी। पास किए गए 19,668.87 करोड़ रुपये में से 15 जुलाई तक 12,871.50 करोड़ रु का लोन बांटा जा चुका है।

अहमदाबाद सबसे आगे
यह योजना वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित 20 लाख करोड़ रुपये के आत्मनिर्भर भारत अभियान का सबसे बड़ा घटक है। जहां तक लोन पास करने का सवाल है तो 19668.87 करोड़ रु में से सबसे अधिक अहमदाबाद क्लसटर (1983 करोड़ रु) ने किया। इसके बाद 1715 करोड़ रु के साथ सूरत का दूसरा नंबर है। 20 मई को कैबिनेट ने एमएसएमई सेक्टर के लिए ईसीएलजीएस के माध्यम से 9.25 प्रतिशत की रियायती दर पर 3 लाख करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त फंडिंग को मंजूरी दी थी।
क्या है ईसीएलजीएस
योजना के तहत पात्र एमएसएमई और इच्छुक माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी (मुद्रा) उधारकर्ताओं को 3 लाख करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त फंडिंग के लिए नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी द्वारा 100 प्रतिशत गारंटी कवरेज प्रदान किया जाएगा। इस उद्देश्य के लिए सरकार ने 41,600 करोड़ रुपये का एक फंड बनाया है, जो मौजूदा और अगले तीन वित्तीय वर्षों तक के लिए है। यह योजना घोषणा की तारीख से 31 अक्टूबर तक या 3 लाख करोड़ रुपये की राशि मंजूर नहीं हो जाने तक लागू रहेगी।
अर्थव्यवस्था में एमएसएमई सेक्टर की भूमिका
भारत की अर्थव्यवस्था के लिए जो महत्वपूर्ण फैक्टर हैं उनमें से एक है सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई)। एमएसएमई सेक्टर में 3.6 करोड़ यूनिट्स शामिल हैं। इस सेक्टर से 8 करोड़ से अधिक लोगो को रोजगार मिलता है। यह सेक्टर 6000 से अधिक उत्पादों का उत्पादन करने के लिए जाना जाता है और इसका जीडीपी में योगदान लगभग 8 फीसदी है। इसके अलावा कुल विनिर्माण (Manufacturing) उत्पादन इसका योगदान लगभग 45 फीसदी और भारत के निर्यात में 40 फीसदी है।


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