नई दिल्ली, मार्च 23। दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम के जंक्शन पर हर दोपहर 12.30 बजे से शाम 4 बजे के बीच सफेद रंग की ऑल्टो कार खड़ी होती है। करण और अमृता बाहर निकलते हैं और डिकी खोलते हैं, अपने एप्रन पहनते हैं और चमकदार स्टील के कंटेनर खोलते हैं। गरमा गरम राजमा, छोले, कढ़ी, चावल और ठंडी छाछ से लदे बर्तनों में से एक अद्भुत सुगंध निकलती है। ये सारे पकवान वे रोडसाइड पर बेचते हैं। करण और अमृता दंपति हैं। जैसे ही वे अपना काम शुरू करते हैं थोड़ी भीड़ उनके आस-पास इकट्ठा होती है, जो अपने खाने के लिए इंतजार करती है। वे एक दिन में कम से कम 100 ग्राहकों को खाना परोसते हैं। दोनों रविवार को छोड़ कर हर दिन खाना परोसते हैं। मगर ये काम उन्होंने ऐसे ही नहीं शुरू किया। सालों तक, करण ने संसद सदस्य के लिए ड्राइवर के रूप में काम किया। लेकिन कोविड-19 महामारी ने उनकी नौकरी ले ली। उसके बाद पति-पत्नी ने मिल कर एक नया शानदार आइडिया ढूंढा और कमाई शुरू की।
नहीं कर पाए पढ़ाई
12वीं कक्षा के बाद करण वित्तीय दिक्कतों के कारण कभी भी हायर स्टडीज नहीं कर पाए। खराब आर्थिक स्थिति ने उन्हें पढ़ाई में कोई दिलचस्पी न होने के लिए प्रोत्साहित किया क्योंकि पैसा कमाना उनकी प्राथमिकता थी। 2015 में करण ने अमृता से शादी की। वे उनसे एक परिचित के माध्यम से मिले थे। द बेटर इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार इन वर्षों में, करण ने कई नौकरियां बदलीं। उन्हें अपनी पिछली नौकरी में 14,000 रुपये का वेतन मिल रहा था। साथ में एक क्वार्टर और अन्य दैनिक आवश्यक चीजें।
रातोंरात गई नौकरी
कोविड-19 में करण ने अपना आश्रय और आय का एक स्रोत खो दिया और महामारी की चपेट में आने पर रातों-रात बेघर हो गए। वे कहते हैं कि सांसद ने कहा कि हम शॉर्ट नोटिस पर छोड़ने के लिए कहा। उन्हें परिसर खाली करने के लिए बस कुछ दिन दिए गए। उनके पास जाने के लिए कोई और जगह नहीं थी।
घर वाले छोड़ चुके थे साथ
करण के अनुसार 2016 में उनके परिवार ने व्यक्तिगत और संपत्ति के विवादों के कारण उनसे अपना रिश्ता खत्म कर दिया था और वह उनसे मदद नहीं मांग सके। उनके ससुराल वालों ने उन्हें नौकरी मिलने तक रहने के लिए जगह की पेशकश की। लेकिन वे अधिक समय तक नहीं रह सके क्योंकि वे नई नौकरी पाने को लेकर अनिश्चित थे।
ससुर ने दी कार
करण के ससुर ने अपनी कार दी और दयालुता दिखाई। इसके बाद दंपति ने दो महीने दिल्ली की सड़कों पर कार के सहारे गुजारे। उन्होंने दिन में नौकरी खोजने की कोशिश की, अपनी भूख मिटाने के लिए बांग्ला साहिब और रकब गंज गुरुद्वारों में खाना खाया। उन्होंने अलग-अलग जगहों पर रातें बिताईं और सार्वजनिक शौचालयों का इस्तेमाल किया।
कितनी है कमाई
फिर अमृता ने करण को एक फूड बिजनेस शुरू करने के लिए कहा। अमृता ने छोले, राजमा, कढ़ी पकोड़े और चावल बेचने का सुझाव दिया। करण मान गये और पैसे जुटाने के लिए अपनी अलमारी और अन्य सामान बेच दिया। उन्हें सोशल मीडिया से भरपूर समर्थन मिला। बिना किसी मार्केटिंग बजट के, व्यापार को बढ़ावा देने के लिए यह उनके लिए अच्छा रहा। ब्लॉगर्स ने काफी हद तक उनकी मदद की। धीरे-धीरे उन्होंने 320 रुपये का मुनाफा कमाया जो बढ़कर 450 रुपये और 800 रुपये प्रतिदिन हो गया। अब उनकी इनकम 60,000 रुपये प्रति माह है। उन्होंने एक नया व्यंजन पेश किया है - शाही पनीर और जल्द ही एक थाली तैयार करने की योजना है।


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