नयी दिल्ली। गत 12 मई को पीएम नरेंद्री मोदी ने कोरोना संकट के आर्थिक प्रभाव से निपटने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की थी। साथ ही उन्होंने कहा था कि इस पैकेज पर विस्तार से जानकारी केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देंगी। इसी संबंध में वित्त मंत्री ने आज लगातार पांचवे दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस की। आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने 7 अहम चीजों पर कई जरूरी ऐलान किए, जिनमें मनरेगा, स्वास्थ्य (शहरी एवं ग्रामीण) और शिक्षा संबंधी, बिजनेस एंड कोविड, कंपनी अधिनियम का डिक्रिमिनलाइजेशन, ईज ऑफ डुइंग बिजनेस, पीएसयू कंपनियों संबंधित कदम, राज्य सरकारें और संबंधित रिसोर्सेज शामिल हैं। साथ ही इसमें उन्होंने देश में काम कर रही कंपनियों को राहत देते हुए कई बड़े ऐलान किए, जिनमें इनसॉल्वेंसी कोड (आईबीसी) में ढील दिया जाना शामिल है। आईबीसी में राहत देने के पीछे सरकार का मकसद ईज ऑफ डुइंग बिजनेस को बेहतर बनाना है।

एमएसएमई को राहत
वित्त मंत्री ने कोरोना की स्थिति के आधार पर एमएसएमई के खिलाफ ताजा इनसॉल्वेंसी कार्यवाही शुरू करने की अवधि को छह महीने से बढ़ा कर एक साल करने का ऐलान किया। इतना ही नहीं एमएसएमई के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही शुरू करने की न्यूनतम सीमा 1 लाख से बढ़ा कर 1 करोड़ कर दी गई है। वित्त मंत्री ने कहा कि ईज ऑफ डुइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए कोरोना संबंधित लोन को आईबीसी के तहत डिफ़ॉल्ट श्रेणी से बाहर रखा जाएगा। आईबीसी कोड की धारा 240ए के तहत एमएसएमई के लिए विशेष इनसॉल्वेंसी रेज्योल्यूशन फ्रेमवर्क जल्द ही अधिसूचित किया जाएगा। इससे एमएसएमई के लिए आईबीसी के तहत अलग नियम हो जाएंगे।
राहत पैकेज में एमएसएमई
वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि ये 20 नहीं बल्कि 21 लाख करोड़ रुपये का राहत पैकेज है। उन्होंने इस पूरे पैकेज की विस्तार से डिटेल साझा की। इस फंड में एमएमएसई सहित व्यवसायों के लिए 3 लाख करोड़ रु की आपातकालीन वर्किंग कैपिटल का ऐलान किया गया। वहीं दबाव में चल रही एमएसएमई के लिए 20,000 करोड़ रु के अतिरिक्त लोन की भी घोषणा की। साथ ही एमएसएमई के लिए 50,000 करोड़ रु के फंड ऑफ फंड का ऐलान किया गया।


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