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Flower Business : दो बहनों ने कर दिया कमाल, कमा रहीं 8 करोड़ रु

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नई दिल्ली, जुलाई 03। भारत में फूलों का बिजनेस काफी कामयाब हो सकता है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि यहां फूलों की मांग बहुत अधिक है। खास कर धार्मिक कार्यों और शादियों के लिए फूलों की काफी अधिक रहती है। इसी जरूरत को एक लड़की ने समझा और अपनी बहन के साथ मिल कर फूलों का बिजनेस किया और आज ये बहनें करोड़ों रु कमा रही हैं। ये कहानी है यशोदा करुतुरी की, जिनकी माँ की एक साधारण शिकायत थी कि उनके क्षेत्र में पूजा के फूलों की कमी है। उन्होंने इसी समस्या पर काम शुरू किया और आज उनके कारोबार का सालाना टर्नओवर 8 करोड़ रु है।

 

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कई तरह के फूल

कई तरह के फूल

यशोदा ने अपनी बहन रिया के साथ बड़े पैमाने पर बाजार के अंतर का पता लगाने के लिए एक मॉडल बनाया, जिसमें ताजे फूल (गुलाब से लेकर गुलदाउदी और कमल तक) हर दिन किसी के घर तक पहुँचाए जा सकते थे, ठीक उसी तरह जैसे दूध का पैकेट या अखबार। आज बेंगलुरु स्थित यह फ्लोरल स्टार्टअप, जिसे एक एंजेल निवेशक से 10 लाख रु के शुरुआती निवेश के साथ लॉन्च किया गया था, सालाना 8 करोड़ रुपये का कारोबार करता है।

2019 में हुई थी शुरुआत

2019 में हुई थी शुरुआत

2019 से शुरू करके दोनों बहनों ने सब्सक्रिप्शन शुरू किया और दशकों पुराने पारंपरिक फूल बाजार को एक 'आधुनिक मोड़' देने का फैसला किया है। यह कारोबार उनके लिए अनुपयुक्त नहीं था। असल में उनके परिवार के पास फूलों का फलता-फूलता बिजनेस था। उसे उन्होंने एक नये तरीके से पेश करने का फैसला किया था।

पिता का शानदार बिजनेस
 

पिता का शानदार बिजनेस

द बेटर इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार रिया कहती हैं कि उनके पिता राम करुतुरी केन्या, इथियोपिया और भारत में गुलाब के खेतों के मालिक हैं। 90 के दशक में उनके केन्याई फार्म को दुनिया के सबसे बड़े गुलाब फार्म के रूप में मान्यता मिली थी। दोनों बहनें यह सब देखते हुए बड़ी हुईं कि कैसे कट-फ्लावर उद्योग वर्षों से नाटकीय रूप से बदल गया है।

पूजा वाले फूलों का बिजनेस कमजोर

पूजा वाले फूलों का बिजनेस कमजोर

यशोदा, जो सेंट लुइस में वाशिंगटन विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट हैं, के अनुसार भारत के फूल उद्योग में विशाल बाजार खाई है, जो दशकों से अछूती है। हालांकि फूलों के गुलदस्तों का बाजार काफी व्यवस्थित और फला-फूला है, लेकिन पारंपरिक पूजा वाले फूलों का बाजार बहुत पीछे है। वह कहती हैं कि भारतीय पारंपरिक फूलों जैसे चमेली, गेंदा, गुलदाउदी और कली गुलाब का इस्तेमाल अलग-अलग तरीकों से करते हैं। पूजा के लिए उनका उपयोग करने के अलावा, लोग उन्हें अपने बालों पर पहनना, या उन्हें अपने ऑटो, कारों, दुकानों और कार्यालयों में लटकाना पसंद करते हैं।

कितने मिलते हैं ऑर्डर

कितने मिलते हैं ऑर्डर

फूलों से लेकर माला और विभिन्न ग्रीन्स जैसे तुलसी और दरभा घास तक, हूवू (स्टार्टअप का नाम) उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पेश करता है। यशोदा कहती हैं, हम अपनी वेबसाइट के अलावा बिग बास्केट, ग्रोफर्स, सुपर डेली, जोमैटो, मिल्कबास्केट, एफटीएच डेली और जेप्टो जैसे विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भरोसा करते हैं। वे बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, मैसूर, पुणे, मुंबई, गुरुग्राम और नोएडा से प्रति माह 1,50,000 से अधिक ऑर्डर प्राप्त करती हैं।

English summary

Flower Business Two sisters have done amazing earning 8 crores

This is the story of Yashoda Karuturi, whose mother had a simple complaint that there was a shortage of worship flowers in her area. He started work on this problem and today the annual turnover of his business is Rs 8 crores.
Story first published: Sunday, July 3, 2022, 10:30 [IST]
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