नई दिल्ली, अप्रैल 17। कोयंबटूर में पली-बढ़ी, दीपिका वेलामुरुगन अपनी माँ को अपने घर के प्रवेश द्वार पर चावल के आटे के कोलम बनाते हुए देखती थीं। उनके अनुसार ये डॉट्स, विभिन्न ज्यामितीय रेखाओं, आकृतियों और रंगों के संयोजन का उपयोग करके बनाई गई जटिल और सुंदर डिजाइन थे। इन वर्षों में, दीपिका ने अपनी माँ से इस तरह के हजारों डिज़ाइन सीखे और फिर इस अभ्यास को एक शौक के रूप में लिया। आज दीपिका पारंपरिक कोलम डिज़ाइनों से सजी लकड़ी की घरेलू सजावट की वस्तुओं को बेचने का एक सफल बिजनेस चलाती हैं, और प्रति माह लगभग 75,000 रुपये का लाभ कमाती हैं।
शौक को बनाया बिजनेस
द बेटर इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार बचपन से ही पेंटिंग और ड्राइंग से प्यार करने वाली, दीपिका ने कोयंबटूर से कॉस्ट्यूम डिज़ाइन में बीएससी की पढ़ाई की और तिरुपुर स्थित कपड़ा निर्माताओं के लिए कपड़ों की डिज़ाइनिंग शुरू की। 2010 में अपनी शादी के बाद, वह अपने परिवार पर ध्यान केंद्रित करने के लिए श्रीरंगम चली गईं और अपनी डिजाइन की नौकरी छोड़ दी। उस समय डिजाइनिंग में अपनी रुचि को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त समय मिलना मुश्किल था।
कोलम डिजाइनों की पेंटिंग का विचार
एक मौका आया दीपिका को अपने बिजने को आगे बढ़ाने का मौका मिला। एक बार वे अपने घर को सजा रही थीं। उन्हें घर की सजावट की वस्तुओं पर कोलम के डिजाइनों को चित्रित करने के विचार आया। उन्होंने शुरुआत में एक लकड़ी का पालना सेप्रेटर पाया, इसे सफेद कोलम डिजाइनों से रंगा, और तैयार करके इसे इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया। उन्हें अच्छा रेसपोंस मिला।
2019 से खूब मिल रहे ऑर्डर
दीपिका ने महसूस किया कि लोग पारंपरिक डिजाइनों को पसंद करते हैं। उन्हें अपने फॉलोअर्स से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया के आधार पर वह कहती हैं, जब से उन्होंने 2019 में इस काम को शुरू किया, तब से उनके हाथ दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आने वाले ऑर्डर से भरे हुए हैं। यानी उन्हें 2019 से देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर से खूब ऑर्डर मिल रहे हैं।
30000 हैं फॉलोअर्स
होम2चेरिश नाम से दीपिका के इंस्टाग्राम वेंचर के अब लगभग 30,000 फॉलोअर्स हैं। उन्होंने साधारण लकड़ी की दीवार की अलमारियों से शुरुआत की थी, अब वह विभिन्न आकारों, लकड़ी के तख्तों, नेम बोर्ड्स, दीवार के हैंगिंग और लकड़ी के दरवाजों के पैनल में कोलम पादी (पूजा कक्षों में देवताओं की मूर्तियों और दीपकों को रखने के लिए लकड़ी के स्टेप्स) बनाती हैं।
किस तरह की लकड़ी का इस्तेमाल
वे मुख्य रूप से आम की लकड़ी, रबर की लकड़ी, सागौन की लकड़ी, नीम की लकड़ी आदि का उपयोग सजावट के सामान बनाने के लिए करती हैं। उनकी क्वालिटी सुनिश्चित करने के बाद उन्हें ज्यादातर स्थानीय डीलरों से प्राप्त किया जाता है। वह कहती हैं कि गृह सज्जा बिजनेस केवल प्री-ऑर्डल पर लिया जाता है। वे अपने ग्राहकों के ऑर्डरों की धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करने के लिए उनकी आभारी हैं। लकड़ी का सारा काम उनके बढ़ई द्वारा किया जाता है। सजावट की वस्तुओं की कीमत 1,500 रुपये से 20,000 रुपये के बीच है और इन्हें भारत और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में भेज दिया गया है। दीपिका कहती हैं कि उनके यूएस, यूके, ऑस्ट्रेलिया, नॉर्वे, जर्मनी और फ्रांस सहित देशों के ग्राहक हैं।
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