नई दिल्ली, सितंबर 25। हर शाम, ओडिशा के मलकानगिरी में टाउन के कलेक्टर के ऑफिस के पास सड़क पर एक खाने का ठेला खड़ा होता है। इस ठेले पर स्वादिष्ट बिरयानी और चिकन टिक्का बेचा जाता है। यह ठेला मार्च 2021 से लगातार चालू है, जो पूरी सड़क पर मसालों की सुगंध फैलाता है। अहम बात यह है कि इस मशहूर ठेले के पीछे खड़े लोग कोई शेफ नहीं हैं। वे दो कॉर्पोरेट कर्मचारी हैं, जो इंजीनियर ठेला नाम से अपना एक छोटा साइड बिजनेस चलाते हैं और अपने शहर की खाने की संस्कृति में बदलाव लाना चाहते हैं। अहम बात यह है कि ये दोनों प्रोफेश्नल इंजीनियर हैं और सैलेरी के अलावा हर महीने अपने ठेले से लाखों रु कमाते हैं।
बचपन के हैं दोस्त
दोनों इंजीनियर सुमित सामल और प्रियम बेबर्ता बचपन से दोस्त रहे हैं। कोविड-19 वायरस के कारण उन्हें घर से ही काम करना पड़ रहा है। मगर दोनों शाम को बिरयानी खाने के लिए स्थानीय स्ट्रीट वेंडर्स के पासे आते। हालांकि कृषि जागरण की रिपोर्ट के अनुसार प्रियम ने खुलासा किया कि करीब से देखने पर पता चलता है कि इन स्टॉलों की स्थिति काफी संदिग्ध है। उनका मतलब हाइजीन से था।
सफाई-सुथराई की कमी थी
प्रियम के अनुसार हर कोई स्ट्रीट फूड का आनंद लेता है, और कई लोग जो ज्यादा पैसा खर्च नहीं कर सकते, ऐसे ठेले वाले उनके पोषण का एकमात्र सोर्स हैं। वे भी ऐसे ठेले के पास खाना खा रहे थे जो सीवर ड्रेन के पास खड़ा था। पकवान में खाने की चीजों की क्वालिटी भी अच्छी नहीं थी। इस हालत ने इन दोनों को हैंडमेड भोजन बेचने वाले एक ऐसे ही बिजनेस को शुरू करने के आइडिया को जन्म दिया।
स्वच्छता पर था ध्यान
दोनों दोस्तों की नजर अद्भुत स्वाद के साथ स्वच्छ भोजन बनाने और इसे सभी के लिए सुलभ बनाना था। प्रियम बताते हैं कि, बावजूद इसके दोनों में से कोई भी शेफ नहीं है, उन्होंने अपनी मां के साथ खाना बनाते हुए घर पर बिरयानी बनाना सीखा। इससे एक कदम और आगे बढ़ते हुए, इन दोनों ने विभिन्न व्यंजनों पर शोध करने में कई घंटे बिताए कि कैसे कोई सामग्री एक दूसरे की पूरक हैं, और मेनू कैसे बनाए जाते हैं।
50000 रु से की शुरुआत
दोनों दोस्तों ने बिजनेस को चलाने और चलाने के लिए 50000 रुपये के शुरुआती निवेश से बिजनेस का आगाज किया। दो कुक को काम पर भी रखा गया और दिन-प्रतिदिन के काम के लिए एक कमरा किराए पर लिया गया। इनका टार्गेट ऐसा खाना उपलब्ध कराना था जो घर के बने भोजन के समान हों। क्वालिटी बढ़िया हो इसने के लिए, वे खाना पकाने की सभी प्रोसेस की सावधानीपूर्वक निगरानी करते। बाजार से कच्चा माल खरीदने भी दोनों दोस्त जाते हैं।
कितनी है कमाई
हर शाम काम के बाद, वे खाना बेचने के लिए ठेले को अपनी जगह पर ले आते हैं। चिकन बिरयानी की एक सिंगल प्लेट 120 रुपये में मिलती है, जबकि आधी प्लेट की कीमत 70 रुपये है। इस तरह वे रोज करीब 8000 रु कमाते हैं। यानी महीने में करीब 2.5 लाख रु है। मगर ये कमाई है, जबकि प्रोफिट इससे कम है।
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