नई दिल्ली, दिसंबर 29। भारत में कूरियर सेवाएं लंबे समय से मौजूद हैं। समय के साथ इनकी जरूरत बढ़ी है और ढेरों नयी कंपनियां इस बिजनेस में उतरी हैं। बता दें कि अधिक से अधिक लोगों के ऑनलाइन बिजनेस में शामिल होने से सस्ती और कुशल कूरियर सेवाओं की मांग बढ़ रही है। दिल्ली जैसे महानगरों में कूरियर सेवा शुरू करना एक अच्छा बिजनेस आइडिया हो सकता है। यदि आप कूरियर बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो ये खबर आपके काम आएगी। क्योंकि हम यहां आपको कूरियर बिजनेस शुरू करने की स्टेप बाय स्टेप प्रोसेस बताएंगे।
बिजनेस सेगमेंट तय करें
कूरियर बिजनेस शुरू करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि किस तरह का पार्सल उसी दिन या अगले कितने दिन में डिलीवर करना है। पार्सल में दस्तावेज, सामान, उत्पाद, खाद्य वस्तुएं आदि आदि हो सकते हैं। इसके अलावा कंपनी शुरू करने या नेटवर्क बनाने के लिए आपको फंड की जरूरत होगी। पैसा या आपके पास हो या फिर आपको फाइनेंसर्स से जुटाना होगा।
ट्रांसपोर्ट चाहिए होगा
उत्पादों की डिलीवरी करने के लिए ट्रांसपोर्ट जरूरी है। माल का साइज और वजन अलग हो सकता है, इसलिए कूरियर कंपनियां बड़े वाहनों को प्राथमिकता देती हैं। अगर आप छोटे प्रोडक्ट की डिलिवरी करेंगे तो छोटी गाड़ियों से काम चल सकता है। इनमें कार्गो वैन, लॉरी, छोटे ट्रक, बाइक या टेम्पो शामिल हैं। पार्सल को पैक करने और ले जाने के लिए, कुछ आवश्यक उपकरणों की आवश्यकता होती है जैसे विभिन्न प्रकार के कार्टन, बॉक्स, डॉली, हैंड ट्रक, टेप, कार्गो स्ट्रैप, मूविंग ब्लेंकेट और बेहतर कनेक्टिविटी के लिए जीपीएस डिवाइस के साथ स्मार्टफोन।
कंपनी को कराएं रजिस्टर
अगला जरूरी काम बिजनेस के लिए एक नाम सोचना है, जिसे कंपनी के अधिनियम 2013 के तहत रजिस्टर करने की जरूरी है। कूरियर बिजनेस को सोल प्रोप्राइटरशिप, साझेदारी फर्म, प्राइवेट लिमिटेड या पब्लिक लिमिटेड कंपनी आदि के रूप में पंजीकृत किया जा सकता है। साथ ही जीएसटी सर्विस टैक्स रजिस्ट्रेशन कराएं। यदि आप बिजनेस को एक यूनिक ब्रांड बनाना चाहते हैं तो नाम का पेटेंट करा सकते हैं और ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन कर सकते हैं।
रेट तय करें
बढ़िया कस्टमर सर्विस और कम मार्जिन कॉम्पिटिटिव रेट वाले बिजनेस हमेशा दौड़ में आगे रहते हैं। हालांकि कुछ छिपे हुए या कम जानकारी वाले शुल्क हैं जिन्हें रेट को अंतिम रूप देते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए। इनमें वाहन रखरखाव लागत, बुक कीपिंग शुल्क, सोशल सिक्योरिटी टैक्स, बिजनेस परमिट रिन्यूअल चार्ज, वेतन वृद्धि, किराए में वृद्धि आदि।
ऐप की होगी जरूरत
एक ऐप की जरूर आपको होगी ही, जिस पर कस्टमर ऑर्डर बुक करें और ऑर्डर ट्रैक करें। इसके बाद आप बिजनेस शुरू कर सकते हैं। शुरुआत में यदि आपके पास ऐप न भी हो तो वेबसाइट से काम चल जाएगा, जो कुछ हजार रु में चालू हो जाएगी। एक और बात कि एक कूरियर कंपनी के तहत आप अपने ग्राहकों के पार्सल सुरक्षित रूप से डिलिवरी करने के जिम्मेदार होते हैं। इसलिए बिजनेस या पार्सल के जोखिम को कम करने के लिए और होने वाले नुकसान से बचने के लिए बिजनेस बीमा जरूरी है। बीमा पॉलिसी आवश्यक हो जाती है, क्योंकि यह ग्राहकों के साथ उनकी वस्तुओं और कंपनी के संबंध में विश्वास बनाती है।
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