E-waste management : कराएगा तगड़ी कमाई, जानिए कैसे करें शुरू

नई दिल्ली, जुलाई 06। आप अपने खराब स्मार्टफोन, लैपटॉप ,कम्प्यूटर, टीवी, रिमोट या एलईडी का क्या करते हैं। हममें से अधिकतर लोग इन खराब हुई चीजों को घर में ही कहीं रख देते हैं और भूल जाते हैं। लेकिन अब लोगों में ई-वेस्ट को लेकर जागरुकता बढ़ी है। लोग अब खराब हुए इलेक्ट्रानिक्स प्रोडक्ट को भी बेच रहे हैं। अब हर घर में मोबाइल फोन, लैपटॉप और टीवी हैं एक निश्चित समय के बाद ये प्रॉडक्ट खराब हो जाते हैं और लोगों को दूसरा खरीदना पड़ता हैं। हर घर में ई-वेस्ट पड़ा हुआ हैं और आगे भी ई-वेस्ट घर-घर में जमा होता रहेगा। ऐसे में अगर कोई ई-वेस्ट मैनेजमेंट का बिजनेस चालू करता है तो यह वर्तमान और भविष्य दोनों के लिए कारगर है। आइए, आज ई-वेस्ट बिजनेस को समझते है।

हर साल 50 टन का ई-कचरा निकलता है

हर साल 50 टन का ई-कचरा निकलता है

अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम के डेटा के अनुसार भारत में हर साल 50 लाख टन ई-कचरा या ई-वेस्ट निकलता है। देश में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के बेतहाशा बढ़ते इस्तेमाल के साथ ही ई-वेस्ट कचरा भी बहुत तेजी से बढ़ रहा है। बढ़ते मांग और मांग के कारण बढ़ते ई-वेस्ट के समय में ई-वेस्ट मैनेजमेंट का काम शुरू करना एक बेहतर विकल्प है।

ज्यादा लागत के बिना होगी कमाई

ज्यादा लागत के बिना होगी कमाई

आप खराब पड़े इलेक्ट्रानिक्स प्रोडक्ट को खरीदकर उसे रिसाइकल सेंटर पर बेच सकते हैं। ई-वेस्ट कचरा के बदले रिसाइक्लिंग सेंटर मोटी रकम देते है। आप शहर के किसी भी जगह ई-कचरे की दुकान खोल सकते हैं। दुकान खोलने के बाद आपको दुकान और ई-वेस्ट कचरा को बेचने को लेकर पूरे शहर भर में प्रचार पर खर्च करना पड़ेगा। इसके बाद आपका बिजनेस आसानी से चलने लगेगा। आप कुछ लोगों को काम पर रख कर भी ई-वेस्ट मोहल्लों से खरीद सकते हैं।

ई-वेस्ट रिसाइकिल सेंटर भी है बेहतर विकल्प

ई-वेस्ट रिसाइकिल सेंटर भी है बेहतर विकल्प

ई-वेस्ट रिसाइकिल सेंटर खोलने के लिए आपको ज्यादा फंड की जरूरत होगी। अगर आप बिजनेस पर फंड खर्च करने में सक्षम हैं तो यह व्यापार आपको कम समय में बहुत ही ज्यादा प्रॉफिट कमा के देगा। चलिए आपको बताते हैं कि रिसाइकिल सेंटर कैसे वर्क करता है।

छटनी करना

छटनी करना मतलब ईलेक्ट्रनिक्स कचरे को अलग-थलग करना। रिसाइकिल सेंटर पर खराब डिवाइस के बैटरी, स्क्रीन आदी को अलग किया जाता है। लैपटॉप और कंप्यूटर की मेमोरी, बैटरी, कीपैड आदि को निकाल के अलग किया जाता है।

डिस्मेंटल प्रोसेस

उपकरणों से प्लास्टिक और अन्य धातुओं को अलग-थलग करने को डिस्मेंटल कहते हैं। हर डिवाइस कई तरह के मेटल से मिलकर बना होता है और प्लास्टिक की मात्रा भी अधिक होती है।

 
आकार छोटा करना

आकार छोटा करना

डिस्मेंटल करने के बाद जिन धातुओं का आकार बड़ा होता है उन्हें छोटा करना पड़ता है ताकि उन्हें आसानी से रिसाइकिल किया जा सके।

क्रशिंग और सेपारेटिंग प्रोसेस

जब धातुओं का आकार छोटा हो जाता है तो उसे इंप्रेस करके उसका चुरा बनाया जाता हैं। जब धातु एकदम महीन हो जाती हैं तो उनको चुंबक या वॉटर वाशिंग प्रोसेस से अलग किया जाता है। इसके बाद इन धातुओं का प्रयोग नया डिवाइस बनाने में किया जा सकता है।

कितनी जगह और मशीन की जरूरत पड़ेगी

कितनी जगह और मशीन की जरूरत पड़ेगी

ई-वेस्ट बिजनेस को शुरू करने के लिए कम से कम 5 हजार वर्ग फीट की जगह की आवश्यकता होगी। इस बिजनेस को शुरू करने में लगभग 25-30 लाख रुपए की मशीनों को खरीदना होगा। आपको इन मशीनों को ऑपरेट करने के लिए अलग से बिजली कनेक्शन लेना होगा। करीब 8-10 लोगों के साथ यह बिजनेस शुरू किया जा सकता है।

क्या है शुरू करने का प्रोसेस

  • सबसे पहले जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराना पड़ेगा
  • एमएसएमई का लाइसेंस लेना होगा
  • पॉल्यूशन बोर्ड से एनओसी लेना जरूरी है
  • राज्य वेस्ट मैनेजमेंट का मेंबर बनना होगा
 

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