नयी दिल्ली। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक सरकार डीलरों को एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) का स्टेटस देने पर विचार कर रही है। इससे डीलरों को एमएसएमई को मिलने वाले लाभों का फायदा मिल सकेगा। एमएसएमई, जिनमें मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस यूनिट्स शामिल हैं, को सरकारी योजनाओं के तहत दिए जाने वाले बेनेफिट और सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए खुद को पंजीकृत कराना जरूरी है। पंजीकृत एमएसएमई को टैरिफ सब्सिडी और टैक्स और कैपिटल सब्सिडी का बेनेफिट मिलता है। रजिस्ट्रेशन से उन्हें सरकारी टेंडर्स हासिल करने में भी मदद मिलती है। साथ ही उन्हें कम ब्याज दरों पर लोन की भी सहूलियत मिलती है।

गडकरी ने की अपील
गडकरी ने कहा कि हम डीलर्स को भी एमएसएमई का दर्जा देने के बारे में सोच रहे हैं जिससे उन्हें लाभ मिलेगा। मंत्री ने प्रमुख इंडस्ट्री से एमएसएमई की बकाया राशि को समय पर चुकाने के लिए अपनी अपील को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि हम वित्त मंत्रालय से भी अनुरोध कर रहे हैं कि जो उद्योग अपने प्रौद्योगिकी केंद्रों, प्रशिक्षण केंद्रों, अनुसंधान केंद्र बनाना चाहते हैं कि क्या हम उन्हें इनकम टैक्स के लिहाज से कुछ सहायता देने की स्थिति में हैं या नहीं। इससे वे और अधिक शोध और इनोवेशन के लिए प्रेरित होंगे।
ये है सरकार का खास प्लान
गडकरी ने ये भी कहा कि सरकार जलमार्ग, समुद्री परिवहन, रेल, सड़क और हवाई परिवहन जैसे सभी प्रकार के परिवहन को इंटीग्रेट और डेवलप करने पर भी काम कर रही है, जिससे निश्चित रूप से रसद लागत को कम होगी और उद्योगों को बड़े पैमाने पर मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि परिवहन क्षेत्र के लिए नई परिमार्जन (Scrappage) नीति पर काम आगे बढ़ रहा है। उन्होंने जोर दिया कि सरकार हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है। उद्योगों को इनोवेटिव प्लान्स के साथ आना चाहिए ताकि भारत ऑटोमोबाइल क्षेत्र में एक मैन्युफैक्टरिंग हब बन सके।


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