नई दिल्ली। कोरोना महामारी के चलते देश में लगाए गए लॉकडाउन से सबसे ज्यादा नुकसान सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को हुआ है। इसी कारण सरकार ने इस कारोबारियों की मदद के लिए बड़ा कदम उठाते हुए 3 लाख करोड़ रुपये का बिना गारंटी वाला वर्किंग लोन देने का फैसला किया है। इसी कड़ी में देश से बड़े बैंकों में से एक सेंट्रल बैंक ने आपातकालीन कर्ज सेवा की शुरुआत की है। इसके तहत यह कारोबारी अतिरिक्त वर्किंग कैपिटल लेकर दोबारा अपना उत्पादन सामान्य कर सकते हैं।
एमएसएमई की ये हैं दिक्कतें
लॉकडाउन हटने के बाद सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) का कामकाज धीरे धीरे पटरी पर आ रहा है। हालांकि ऐसी कंपनियों के सामने वर्किंग कैपिटल की बड़ी समस्या है। लॉकडाउन के दौरान व्यवसाय नहीं होने के कारण दैनिक कामों के लिए पूंजी उपलब्ध नहीं है। उद्योगों को इस मुश्किल से छुटकारा दिलाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार ये सेवा शुरू की गई है।
एमएसएमई जानें इस सुविधा के बारे में
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) इस सुविधा का उपयोग कारोबार दोबारा शुरू करने के लिए करेंगे। सेंट्रल बैंक अब आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) के अंतर्गत वर्किंग कैपिटल के लिए निश्चित समयावधि का कर्ज देगा। 29 फरवरी 2020 को एमएसएमई कंपनियों के पास उपलब्ध कुल निधि के 20 प्रतिशत के बराबर राशि बैंक से कर्ज लिया जा सकता है। हालांकि इसकी अधिकतम सीमा 5 करोड़ रुपये है। कंपनियां इस वित्तीय सहायता का उपयोग कच्चे माल की खरीदारी, मजदूरों को वेतन, मुआवजा, अन्य कामकाज और वैधानिक खर्चों को पूरा करने के लिए किया जा सकेगा।
खास ब्याज दर लिया जाएगा
इस कर्ज के लिए बैंक ने रेपो सहित ब्याज लगाया है जो हर साल के लिए 7.50 प्रतिशत होगा। बैंक ने इसके लिए प्रोसेसिंग चार्ज न लेने का फैसला किया गया है। इसी प्रकार इस कर्ज के लिए कोई भी गारंटी शुल्क या दंडात्मक ब्याज भी नहीं लिया जाएगा। पहले से मंजूरी प्राप्त कर्ज के रूप में ये वित्तीय सहायता बैंक द्वारा प्रदान की जाएगी। बैंक ने रेपो रेट में आरबीआई द्वारा कटौती किये जाने का लाभ ग्राहकों को देने के लिए होम लोन पर ब्याज दर कम करके 6.85 प्रतिशत वार्षिक कर दिया है।


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