नई दिल्ली, अक्टूबर 5। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार दुनिया भर में हर साल 35 करोड़ से अधिक जोड़ी जूते फेंक दिए जाते हैं। यह पृथ्वी के लिए एक खतरा है, क्योंकि वर्ल्ड फुटवियर का अनुमान है कि जूते का एक सोल लैंडफिल में 1,000 साल तक बाकी रह सकता है। मगर दो दोस्तों ने पुराने जूतों के लिए एक नया रास्ता निकाला और उसी को अपना बिजनेस बना कर आज करोड़ों रु कमा रहे हैं। ये है कहानी श्रेयंस भंडारी और रमेश धामी की। ये दोनों एथलीट हैं और ये जानते थे कि जूतों का खराब होना और उन्हें फेंकना आम बात है। दोनों ने इस बड़ी अनसुलझी समस्या के बारे में सोचा और एक नया बिजनेस आइडिया ढूंढ निकाला।
जूतों को किया जाता है रीसाइकिल
दोनों दोस्तों ने सोचा कि क्या इन फेंके गए जूतों का उपयोग करने का कोई वैकल्पिक तरीका है और तभी उन्हें इन जूतों को रीसाइकिल करने का आइडिया आया। दुनिया को और अधिक स्थिर और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से श्रेयंस और रमेश ने कॉर्पोरेट्स के लिए पुराने जूतों को रीसायकल करने के लिए 10 लाख रुपये की पूंजी के साथ 2015 में ग्रीनसोल नामक ब्रांड की शुरुआत की। इस ब्रांड ने 2019 में एक वीगन फुटवियर रेंज लॉन्च करके रिटेल में भी अपना काम शुरू किया।
3 करोड़ रु का टर्नओवर
पांच साल से कुछ अधिक समय में ग्रीनसोल अब दो यूनिट्स, बी 2 बी (बिजनेस टू बिजनेस) और रिटेल, के तहत काम करता है, कॉर्पोरेट्स को उनके सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रेस्पोंसबिलिटी) अभियानों के लिए रीसाइकिल्ड जूते बेचता है और सीधे ग्राहकों को वीगन जूते बेचता है। ब्रांड ने वित्त वर्ष 2019-20 में 3 करोड़ रुपये का कारोबार किया।
जूते से बनी स्लिपर पेश की
ग्रीनसोल की स्थापना से पहले श्रेयन्स और रमेश ने आईआईटी बॉम्बे द्वारा आयोजित एक प्रतियोगिता में भाग लिया, और जूते से बने एक स्लिपर के अपने प्रोटोटाइप का प्रदर्शन किया। तभी उनका आइडिया कामयाब की ओर बढ़ने लगा। दोनों ने जूतों को चप्पलों में बदलना शुरू किया और उन्हें सीएसआर डोनेशन के माध्यम से विभिन्न गैर सरकारी संगठनों को डोनेट कर दिया।
एडिडास भी है ग्राहक
सबसे पहले, उन्होंने अपनी सीएसआर पहल के लिए जेएलएल को रीसाइकिल्ड जूते बेचे। उसके बाद ओएनजीसी, एडिडास, स्केचर्स और कई अन्य को जूते बेचते रहे। आज ग्रीनसोल अपने बी2बी रीसाइकल्ड शूज़ बिजनेस के लिए लगभग 65 कॉर्पोरेट्स के साथ साझेदारी में है। हाल ही में ग्रीनसोल ने अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में अपसाइकल और टिकाऊ परिधानों को भी शामिल किया है।
कहां से लेते हैं जूते
कंपनी विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों से पुराने जूतों के साथ-साथ उन्हें फिर से तैयार करने के लिए इंडिविजुअल दान भी लेती है। यह उन कॉर्पोरेट्स के साथ काम करती है जो अपने कर्मचारियों से पुराने और खराब हो चुके जूतों को रीफर्बिशिंग के लिए इकट्ठा करते हैं। इसके साथ ही, कंपनी ने एच एंड एम, मेट्रो, एडिडास और कई फुटवियर ब्रांडों के साथ हाथ मिलाया है, जो रीसाइक्लिंग के लिए ग्रीन्सोल को अपना डेड स्टॉक देते हैं। ग्रीनसोल का लक्ष्य ऐसी तकनीक विकसित करना भी है जो उन्हें वेस्टेज को कम करने के लिए बायोडिग्रेडेबल फुटवियर बनाने में मदद करे। श्रेयन्स का कहना है कि यह तकनीक प्रमुख ब्रांडों द्वारा अपनाई जा रही है और इससे बेहतर फ्यूचर की उम्मीद है।
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