नई दिल्ली, दिसंबर 18। अंकित प्रसाद झारखंड के एक छोटे से शहर चाईबासा से आते हैं। वे हमेशा से एक बिजनेसमैन बनना चाहते थे। बचतन में बड़े होकर उनका सपना बिल गेट्स बनने का था। कंप्यूटर उन्हें काफी पसंद था। उनके पिता काफी दूरदर्शी थे, जिन्होंने उनकी मदद की। उस दौरान अंकित के पिता को एनआईटी जमशेदपुर में भूविज्ञान के प्रोफेसर के रूप में नौकरी मिली, जिससे परिवार जमशेदपुर चला गया। एनआईटी जमशेदपुर में डीएवी स्कूल में शामिल होने तक दोनों भाइयों को अंग्रेजी पढ़ने को नहीं मिली थी। आगे जानिए कि कैसे अंकित आईआईटी तक पहुंचे और फिर ड्रॉआउट होकर भी 750 करोड़ रु की कंपनी के मालिक बने।
2005 में किया बड़ा कारनामा
अंकित पढ़ाई में औसत थे, मगर 2005 में उन्होंने कक्षा 10 के बोर्ड रिजल्ड में स्कूल के टॉप 3 में जगह बनाई। उन्होंने ऐसा करके सभी को चौंका दिया था। वह आईआईटी जाना चाहते थे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुार अंकित कहते हैं कि उन्होंने आईआईटी के प्रति लोगों के जुनून को देखा। साथ ही वे सफलता को महसूस कर सके। मगर सफर आसान नहीं था।
शुरू किया बिजनेस
अंकित और उनके भाई की बचपन से ही कंप्यूटर में रुचि थी। छह साल की उम्र से ही अंकित को कोडिंग काफी पसंद थी। इसलिए दोनों भाइयों ने मिल कर 2005 में वेब डिज़ाइन के साथ अपने सफर की शुरुआत की। उन्होंने एक छोटी कंपनी की शुरुआत की जो लोकल रेस्तरां, सर्विस प्रोवाइडर्स और होटलों के लिए वेबसाइट बनाती। उनके इस छोटे बिजनेस ने तेजी से रफ्तार पकड़ी और मुनाफा कमाना शुरू कर दिया।
देखने में आई दिक्कत
इस बीच आईआईटी परीक्षा की तैयारी के लिए अंकित ने जमशेदपुर के एक कोचिंग सेंटर में जाना शुरू किया। मगर हाइपर मायोपिया से पीड़ित अंकित बोर्ड पर क्या लिखा जा रहा है उसे देख नहीं पाते थे। बड़ी क्लासेज ने भी उन्हें परेशान किया। आखिरकार उन्होंने कोचिंग छोड़ अपने दम पर तैयारी शुरू की। उन्हें एनआईटी में एडमिशन मिला, मगर आईआईटी में नहीं। उन्होंने और मेहनत की और 2008 में आईआईटी दिल्ली में एडमिशन मिल गया।
आईआईटी छोड़ बिजनेस पर ध्यान
वे आईआईटी पड़ रहे थे। मगर फ्लिपकार्ट, स्नैपडील और ज़ोमैटो ने उन्हें प्रेरित किया। 2012 में अपने भाई के साथ हॉस्टल में ही टच टैलेंट बनाया। यह एक वेब-आधारित ग्लोबल कम्युनिटी है, जो कई तरह की सर्विस प्रोवाइड करती है। अपने इस टच टैलेंस पर ध्यान देने के लिए वे कम क्लास लेने लगे और सेमेस्टर परीक्षाओं में भी शामिल नहीं हुए। फिर उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री छोड़ फुल टाइम बिजनेस पर ध्यान देने का फैसला किया।
सही था फैसला
अंकित स्मार्टफोन इंडस्ट्री में आगे बढ़ना चाहते थे। उन्होंने 2015 में 'बॉबल एआई' की शुरुआत की जिसने 'बॉबल इंडिक' कीबोर्ड बनाया। आज दुनिया भर की लगभग 120 भाषाओं में (37 भारतीय भाषाओं सहित) ये कीबोर्ड सर्विस देता है। 2020 में इसकी वैल्यू 500 करोड़ से अधिक थी, जो 2021 की तीसरी तिमाही में बढ़कर 750 करोड़ से अधिक हो गयी। यानी अंकित का आईआईटी छोड़ बिजनेस का फैसला सही था। उनकी ऐप के अब 6.5 करोड़ से अधिक यूजर्स हैं। वैश्विक स्मार्टफोन कंपनियों जैसे शिओमी, जियोनी, पैनासोनिक और लावा के साथ दक्षिण अफ्रीका, पाकिस्तान, तुर्की और यूरोप में कई अन्य लोगों के साथ साझेदारी है।
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