नई दिल्ली, अप्रैल 3। गुजरात के तन्वी और हिमांशु पटेल उन लोगों में से हैं जो स्वेच्छा से जैविक खेती करने के लिए कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ रहे हैं। उन्होंने यह पता लगाने के बाद अपनी नौकरी छोड़ दी कि जिस किसान ने उनका खेत किराए पर लिया था, उस पर विषाक्त पदार्थों (टॉक्सिक) का छिड़काव करता था। हिमांशु मैकेनिकल इंजीनियर थे और जेएसडब्ल्यू पावर प्लांट में सीनियर मैनेजर के तौर पर काम कर रहे थे। तन्वी एक शिक्षक के रूप में काम करती थी। मगर उन्होंने नौकरी छोड़ कर एक नया बिजनेस शुरू किया।
जैविक शहद बनाना शुरू किया
इस दंपति की जैविक शहद की खेती की यात्रा वर्ष 2019 में शुरू हुई। रसायनों के उपयोग के वैकल्पिक तरीके की तलाश के दौरान मधुमक्खी पालन एक विकल्प के रूप में सामने आया। उन्होंने स्वयं प्रयोग किया और पाया कि पर्याप्त पोलीनेशन प्राप्त करने से फसलों की ग्रोथ में वृद्धि हुई। बाद में उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र से मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
मधुमक्खी पालन में विशेषज्ञता
उन्होंने अपनी मधुमक्खी पालन विशेषज्ञता को शामिल करते हुए जैविक शहद बनाना शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने केवल 1 से 2 लकड़ी के टोकरे शहद के साथ शुरुआत की और फिर धीरे-धीरे क्रेटों की संख्या 500 तक पहुंचा दी। मधुमक्खियां 3-4 किलोमीटर की दूरी से भी रसायनों को अपने अंदर लेने से तुरंत मर सकती हैं। इसी कारण तन्वी और हिमांशु को तब लगभग 3,60,000 रुपये का नुकसान हुआ, जब उनकी मधुमक्खियों ने पास के एक खेत से रसायनों को अंदर ले लिया और उनकी मृत्यु हो गई।
मधुमक्खी पालकों से मधुमक्खियां खरीदने का फैसला
अगले सीज़न की शुरुआत में, अक्टूबर से अप्रैल तक, दंपति ने अपने बक्सों को अपने खेत के बिल्कुल अंत में ट्रांसफर कर दिया। उन्होंने मधुमक्खी पालकों से मधुमक्खियां खरीदने का फैसला किया और प्रत्येक लकड़ी के टोकरे में आठ छत्तों को इकट्ठा किया, जिससे कुल 30,000 मधुमक्खियां आईं। उन्होंने सीजन के दौरान 4000 रुपये में छत्ते खरीदे। वरना इनकी कीमत 17000 रुपये तक हो सकती है। उन्हें कृषि विज्ञान केंद्र से मधुमक्खी के छत्ते प्राप्त हुए। उन्होंने मधुमक्खियों की कटाई की कार्रवाई शुरू की, जिसमें आमतौर पर 12 दिन तक का समय लगता है।
12 लाख रु है कमाई
तन्वी वर्तमान में अपना खुद का ब्रांड 'स्वद्य' चलाती हैं और सोशल मीडिया के जरिए अपने उत्पाद बेचती हैं। तन्वी और हिमांशु ने अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कई स्थानीय बिजनेसों को भी साथ लिया। वर्तमान में उनके पास लगभग 300 मधुमक्खी के छत्ते हैं, जो प्रति वर्ष लगभग 9 टन शहद पैदा करते हैं। तन्वी और हिमांशु पटेल मधुमक्खी पालन से प्रति वर्ष लगभग 12 लाख रु कमाते हैं।
आप भी शुरू करें
आप भी ये बिजनेस कर सकते हैं। बता दें कि नेशनल मधुमक्खी बोर्ड ने नाबार्ड के सहयोग से भारत में मधुमक्खी पालन कारोबार के लिए एक फाइनेंस स्कीम शुरू की है। कारोबार के लिए आप नेशनल मधुमक्खी बोर्ड कार्यालय में जाकर पता कर सकते हैं या इसकी आधिकारिक वेबसाइट से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। मधुमक्खी पालन पर केंद्र सरकार 80 फीसदी से 85 फीसदी तक सब्सिडी देती है।


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