छोटे कारोबारों को बैंक नहीं दे रहे लोन, मोदी सरकार को आना पड़ा आगे

नयी दिल्ली। भारतीय बैंक छोटी कंपनियों को लोन देने के लिए अनिच्छुक और अपने पास कैश जमा कर रहे हैं। इस वजह से देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही लाखों कंपनियों को बचाने के लिए सरकार को मजबूरन आगे आना पड़ा है। बैंक आरबीआई के साथ प्रतिदिन 92 अरब डॉलर का रिकॉर्ड रखने के लिए दंड दरों (Penalty Rates) को स्वीकार कर रहे हैं और कॉर्पोरेट्स को क्रेडिट मुहैया करने के आरबीआई कार्यक्रम को रोक कर दिया है। दरअसल बैंक कोरोना महामारी के कारण गहराते आर्थिक संकट को देखते हुए सुरक्षित रहना चाहते हैं। इसीलिए बैंक छोटी कंपनियों को कर्ज न देकर जोखिम से बचना चाहते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने छोटी कंपनियों और एनबीएफसी (जो एमएसएमई सेक्टर को कर्ज देती हैं) के लिए 62 अरब डॉलर के लोन का ऐलान किया। ये सरकार के 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज का हिस्सा है।

लॉकडाउन में कमजोर हुए हैं बैंक

लॉकडाउन में कमजोर हुए हैं बैंक

बैड लोन के लंबे इतिहास, एनबीएफसी सेक्टर में संकट और मार्च में यस बैंक संकट के चलते भारतीय बैंक लॉकडाउन में के बाद कमजोर हुए हैं। इससे अर्थव्यवस्था पर काफी निगेटिव असर पड़ा और बेरोजगारी दर 27 फीसदी तक पहुंच गई। हाल ही में रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने एक रिपोर्ट जारी की थी जिसके मुताबिक वित्त वर्ष 2020-21 में क्रेडिट ग्रोथ 2 से फीसदी रह सकती है, जो इसका कई दशकों का निचला स्तर होगा।

चीन के मुकाबले उल्टे हालात

चीन के मुकाबले उल्टे हालात

बैंकों की तरफ से कर्ज दिए जाने की स्थिति भारत में चीन से एक दम उलट है। वहां सरकार के कहने पर Industrial & Commercial Bank of China Ltd. सहित सरकारी बैंकों ने पहली तिमाही में लोन देने में 22 फीसदी की बढ़ोतरी की। कोरोना संकट के बीच बचे रहने के लिए लोन चीन की छोटी कंपनियों के लिए लाफलाइन है।

सरकार के बड़े ऐलान

सरकार के बड़े ऐलान

कृषि क्षेत्र को मजबूती देने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 लाख करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की। इससे कीमत और किसानों की इनकम बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा 10000 करोड़ रुपये की एक खास योजना का ऐलान किया। ये 10000 करोड़ रुपये की योजना माइक्रो फूड एंटरप्राइजेज (एमएफई) के औपचारिकरण के लिए होगी, जिससे पीएम मोदी की 'Vocal for Local' पहल को बढ़ावा मिलेगा। पशुधन और पशुपालन के लिए भी 28,343 करोड़ रु का ऐलान किया। इसमें से एनिमल हसबैंडरी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड के लिए 15,000 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे।

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