उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार प्रदेश को विकास की नई राह पर ले जाने के लिए बड़े कदम उठा रही है। किसी भी प्रदेश के विकास की सीढ़ि उस प्रदेश के उद्योगों से होकर गुजरती है। लिहाजा योगी सरकार प्रदेश में उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई अहम फैसले ले रही है और नीतियों में भी परिवर्तन कर रही है।
प्रदेश में उद्योग को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार ने उद्योगपतियों से उनके सुझाव लेने शुरू कर दिए हैं। योगी सरकार का मुख्य लक्ष्य उद्योगपतियों उनकी सलाह लेकर इसी के आधार पर नीति बनाने पर जोर है ताकि प्रदेश सरकार का कामकाज बेहतर हो सके। सरकार का उद्देश्य है कि इससे प्रदेश में निवेश बढ़े और सरकार बेहतर तरह से संभाल सके।

इसके लिए प्रदेश सरकार ने हर जिले में उद्योगमित्रों की तैनाती की है,इनके फीडबैक के आधार पर नीतियों का निर्माण किया जाएगा। खुद योगी आदित्यनाथ का मानना है कि देश और राज्य में आर्थिक परिवेश को बदलने के लिए नीति और निर्णय काफी अहम होते हैं। स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया जैसी पहल ने देश में औद्योगिक विकास की नई पहचान दी है।
यही वजह है कि उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ सालों में निवेश बढ़ा है और यूपी उद्योगपतियों की बेहतर पसंद के तौर पर उभरा है। उद्योगों को बढ़ाने के लिए प्राकृतिक संसाधन से लेकर मानव संसाधन और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध है। उत्तर प्रदेश में तकरीबन 37.7 सड़कें एक्सप्रेसवे हो चुकी हैं। गंगा एक्सप्रेसवे के साथ छह और एक्सप्रेसवे बन रहे हैं, जिसके बाद देश का 50 फीसदी एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में होगा जो अपने आप में बड़ा बदलाव है।
प्रदेश की कानून व्यवस्था को बेहतर किया गया है ताकि निवेशकों का प्रदेश में भरोसा बढ़े। सिंगल विंडो सिस्टम की शुरुआत की गई है ताकि उद्यमियों को किसी भी तरह की कोई दिक्कत ना हो। नोएडा की ही तरह बुंदेलखंड में भी औद्योगिक विकास प्राधिकरण तैयार किया जा रहा है। यहां 33 गांवों के 13000 हेक्टेयर क्षेत्र को विकसित किया जा रहा है।


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